अजित पवार विमान क्रैश मामले में तीन एंगल पर सस्पेंस, क्या था हादसे का असली कारण?
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की बारामती एयरपोर्ट के पास हुए विमान हादसे में मौत हो गई, जिसमें उनके साथ चार अन्य लोग भी मारे गए. हादसे की जांच तीन प्रमुख पहलुओं मौसम, तकनीकी खराबी और मानवीय चूक पर केंद्रित है.

महाराष्ट्र की राजनीति में समय के बेहद पाबंद और रणनीतिक चालों के लिए पहचाने जाने वाले अजित पवार की जीवन-यात्रा बुधवार सुबह अचानक थम गई. सुबह करीब 8 बजकर 45 मिनट पर बारामती एयरपोर्ट के पास हुए एक भयावह विमान हादसे में राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत पांच लोगों की मौत हो गई. यह दुर्घटना सिर्फ एक तकनीकी हादसा थी या इसके पीछे कोई गंभीर चूक अथवा साजिश छिपी है, इस सवाल ने देश की राजनीति और जांच एजेंसियों को आमने-सामने ला खड़ा किया है.
शुरुआती जांच में क्या बताया गया?
शुरुआती जांच में विमान को तकनीकी रूप से सुरक्षित बताया गया है, लेकिन कई अनुत्तरित सवाल अब भी बने हुए हैं. हादसे के बाद घटनास्थल का मंजर बेहद भयावह था. जले हुए मलबे और उठती आग की लपटों के बीच शवों की पहचान करना मुश्किल हो गया था. पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अजित पवार की पहचान उनके हाथ में बंधी घड़ी से हुई, जो उनके व्यक्तित्व और राजनीतिक पहचान दोनों का प्रतीक मानी जाती थी. जिस नेता ने जीवन भर समय के अनुशासन को महत्व दिया, उसकी पहचान भी उसी घड़ी से होना लोगों को भीतर तक झकझोर गया.
अजित पवार का पार्थिव शरीर बारामती लाया जा चुका है. अस्पताल के बाहर उनकी चचेरी बहन और सांसद सुप्रिया सुले का रो-रोकर बुरा हाल था, जिसे देखकर वहां मौजूद लोग भी भावुक हो उठे. गुरुवार सुबह 11 बजे बारामती के विद्या प्रतिष्ठान मैदान में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई प्रमुख नेता शामिल होंगे.
हादसे की जांच सात मिनटों पर केंद्रित
हादसे की जांच अब विमान के अंतिम सात मिनटों पर केंद्रित है. 28 जनवरी की सुबह 8:10 बजे ‘लियरजेट-45’ ने मुंबई से बारामती के लिए उड़ान भरी थी. अजित पवार जिला परिषद चुनाव से जुड़ी रैलियों के लिए जा रहे थे. मौसम सामान्य था और उड़ान के दौरान किसी तरह की चेतावनी जारी नहीं की गई थी. करीब 8:37 बजे विमान रडार से गायब हुआ और दो मिनट बाद दोबारा दिखाई दिया. इस दौरान पायलटों ने ‘गो-अराउंड’ यानी लैंडिंग रोककर फिर से ऊंचाई लेने की प्रक्रिया अपनाई.
फ्लाइट डेटा के मुताबिक, पहली बार 8:38 बजे लैंडिंग की कोशिश की गई, लेकिन दृश्यता कम होने के कारण रनवे साफ नजर नहीं आया. इसके बाद 8:43 बजे विमान ने दोबारा रनवे की ओर रुख किया और पायलटों ने रनवे दिखाई देने की सूचना दी. एटीसी से लैंडिंग की अनुमति मिलते ही विमान रनवे के शुरुआती हिस्से के पास पहुंचा, लेकिन अचानक संतुलन बिगड़ गया और वह पास की खाई में गिरकर आग के गोले में तब्दील हो गया.
हादसे को तीन प्रमुख पहलुओं से परख रही जांच एजेंसियां
जांच एजेंसियां इस हादसे को तीन प्रमुख पहलुओं से परख रही हैं. पहला, मौसम और दृश्यता. आधिकारिक तौर पर दृश्यता 3,000 मीटर बताई गई, लेकिन पायलटों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान इससे अलग संकेत देते हैं. बारामती का रनवे ‘टेबल-टॉप’ श्रेणी का है, जहां ऊंचाई का भ्रम होना आम बात है और यहां आधुनिक इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम की भी कमी है.
दूसरा पहलू तकनीकी है. विमान पूरी तरह एयरवर्थी था. पायलट अनुभवी और मेडिकल रूप से फिट थे. फिर भी यह सवाल उठ रहा है कि क्या आखिरी क्षणों में ऊंचाई या गति का गलत आकलन हुआ. तीसरा और सबसे संवेदनशील पहलू मानवीय चूक का है. क्या जल्दबाजी में दूसरी बार लैंडिंग की कोशिश की गई या रनवे दिखने का भ्रम हुआ.
हादसे के बाद सियासी गलियारों में भी हलचल तेज हो गई. विपक्षी नेताओं ने निष्पक्ष जांच और साजिश की आशंका जताई है, जबकि राज्य सरकार ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है. फिलहाल AAIB और DGCA की संयुक्त जांच जारी है और देश की निगाहें इस पर टिकी हैं कि इस त्रासदी की असली वजह क्या सामने आती है.


