दिल्ली बम धमाके का सुराग पैसों से जुड़ा? आरोपी डॉक्टर ने अचानक मांगी थी एडवांस सैलरी
लाल किला के ब्लास्ट मामले में अब जांचकर्ताओं को आरोपी डॉक्टर अदील अहमद राथर की एक पुरानी वॉट्सऐप चैट से महत्वपूर्ण सुराग मिला है. इस चैट से पता चलता है कि धमाके से लगभग दो महीने पहले अदील ने अपने वरिष्ठों से बार-बार एडवांस सैलरी की मांग की थी.

दिल्ली में लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास 10 नवंबर को हुए कार बम विस्फोट की जांच लगातार नए खुलासे कर रही है. अब जांचकर्ताओं को आरोपी डॉक्टर अदील अहमद राथर की एक पुरानी वॉट्सऐप चैट से महत्वपूर्ण सुराग मिला है. इस चैट से पता चलता है कि धमाके से लगभग दो महीने पहले अदील ने अपने वरिष्ठों से बार-बार एडवांस सैलरी की मांग की थी. इससे संदेह गहरा गया है कि उसने उस समय प्राप्त धनराशि का उपयोग हमले की साजिश में किया होगा.
अदील अहमद राथर पहले अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेजिडेंट था. मार्च 2025 में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में एक निजी अस्पताल से जुड़ा और वहां उसे अच्छी तनख्वाह भी मिल रही थी. इसके बावजूद सितंबर में अचानक उसकी आर्थिक जरूरतें बढ़ गईं और उसने लगातार कई दिनों तक सैलरी पहले देने का अनुरोध किया.
फोन से डिलीट चैट रिकवर होने पर खुला राज
रिपोर्ट के मुताबिक, 6 नवंबर को अदील की गिरफ्तारी के बाद जब उसका फोन फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया, तो उसमें से डिलीट किए गए मैसेज भी रिकवर किए गए. इन्हीं मैसेज में 5 से 9 सितंबर के बीच अस्पताल के एक वरिष्ठ अधिकारी को भेजे गए संदेश मिले, जिनमें अदील के लगातार पैसे मांगने के सबूत हैं.
5 सितंबर को भेजा गया पहला मैसेज
अदील ने लिखा, गुड आफ्टरनून सर... मैंने एडवांस सैलरी के लिए अनुरोध किया है. कृपया मदद कर दीजिए. मुझे पैसों की बहुत जरूरत है. प्लीज इसे मेरे अकाउंट में जमा करा दीजिए.
6 सितंबर को एक और मैसेज
गुड मॉर्निंग सर, कृपया इसे कर दीजिए. मैं आपका एहसानमंद रहूंगा.
7 सितंबर को जरूरत और बढ़ी
सर, मुझे तुरंत सैलरी चाहिए. पैसों की बहुत सख्त जरूरत है. प्लीज मदद कर दीजिए.
9 सितंबर को आखिरी संदेश
सर, इसे कल ही करा दीजिए… बहुत जरूरी है.
इन लगातार संदेशों ने जांच एजेंसियों का ध्यान इस ओर खींचा है कि कहीं अदील इन पैसों का इस्तेमाल धमाके की तैयारी में तो नहीं कर रहा था. जांचकर्ताओं का मानना है कि यह जरूरत एक प्लांड टेरर मॉड्यूल का हिस्सा हो सकती है.
'ट्रेजरर' था अदील, 8 लाख दिए थे धमाके के लिए
इससे पहले इस मामले में गिरफ्तार फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी के डॉक्टर और सह-आरोपी मुजम्मिल शकील ने पूछताछ में बताया था कि आतंकी ग्रुप के भीतर अदील को ट्रेजरर यानी कोषाध्यक्ष की भूमिका दी गई थी. पुलिस सूत्रों के अनुसार, धमाके में उपयोग किए गए कुल 26 लाख रुपये में से 8 लाख रुपये अदील ने उपलब्ध कराए थे. इस खुलासे के बाद जांच एजेंसियों को यह और भी पुख्ता लगने लगा है कि एडवांस सैलरी की मांग और धमाके के लिए फंडिंग सीधे तौर पर जुड़े हुए हो सकते हैं.
चारों आरोपी ‘व्हाइट कॉलर टेरर नेटवर्क’ के हिस्से
दिल्ली पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने इस मामले में जिन चार मुख्य आरोपियों की पहचान की है, उनमें शामिल हैं-
1. पुलवामा के डॉ. मुजम्मिल शकील गनई
2. अनंतनाग के डॉ. अदील अहमद राथर
3. लखनऊ की डॉ. शाहीन सईद
4. शोपियां के मुफ्ती इरफान अहमद वागे
जांच एजेंसियों के मुताबिक ये चारों जैश-ए-मोहम्मद के 'व्हाइट कॉलर टेरर नेटवर्क' का हिस्सा थे, जो उच्च शिक्षित पेशेवरों को शामिल कर आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने का एक नया तरीका अपनाता है.
जांच का दायरा और बढ़ा
वॉट्सऐप चैट सामने आने के बाद अब यह जांच का बड़ा हिस्सा बन चुका है कि अदील ने सितंबर में प्राप्त की गई रकम का इस्तेमाल कहां किया. एजेंसियां उसके बैंक लेनदेन, डिजिटल ट्रेल और कई अन्य आर्थिक गतिविधियों की जांच में जुटी हुई हैं.
दिल्ली के इस हाई-प्रोफाइल कार बम धमाके ने एक बार फिर दिखा दिया कि आतंकवादी संगठन अब तेजी से पढ़े-लिखे प्रोफेशनल्स को अपने नेटवर्क में शामिल कर रहे हैं और उनके ‘क्लीन प्रोफेशनल बैकग्राउंड’ का फायदा उठाकर सुरक्षा एजेंसियों की नज़र से बचने की कोशिश कर रहे हैं.ट पॉइंट संस्करण** भी तैयार कर दूँ।


