'अब साथ देने का मन नहीं करता', पूर्व TMC सांसद शांतनु सेन ने ममता बनर्जी को सौंपा इस्तीफा

तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आने लगी है. पूर्व राज्यसभा सांसद शांतनु सेन ने राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा देते हुए आरजी कर कांड, भ्रष्टाचार और पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि अब उनके लिए पार्टी का बचाव करना नैतिक रूप से सही नहीं लगता.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस में हालिया चुनावी हार के बाद अंदरूनी असंतोष खुलकर सामने आने लगा है. पार्टी के पूर्व राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता शांतनु सेन ने गुरुवार को राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा देकर सियासी हलकों में हलचल मचा दी. उन्होंने आरजी कर बलात्कार और हत्या मामले समेत भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर पार्टी नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष निशाना साधा.

कोलकाता नगर निगम के पार्षद शांतनु सेन ने तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को अपना इस्तीफा सौंपते हुए कहा कि जनता के फैसले और पार्टी की मौजूदा स्थिति को देखते हुए अब उनके लिए प्रवक्ता के तौर पर पार्टी का बचाव करना नैतिक रूप से संभव नहीं है. हालांकि उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी है.

ममता बनर्जी को भेजा इस्तीफा

शांतनु सेन ने अपने इस्तीफे में लिखा कि वह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में जनता द्वारा दिए गए जनादेश का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय प्रवक्ता पद छोड़ रहे हैं. डॉक्टर से नेता बने सेन ने पत्र में कहा, 'जनता के फैसले को स्वीकार करते हुए, मैंने राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद से इस्तीफा देने का निर्णय लिया है.'

उन्होंने साफ किया कि वह लंबे समय से पार्टी के 'वफादार सिपाही' रहे हैं, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं.

'अब बचाव करना नैतिक रूप से ठीक नहीं'

अपने पत्र में सेन ने कहा कि कई बार उन्होंने निजी तौर पर असहमति होने के बावजूद टीवी डिबेट और मीडिया मंचों पर पार्टी का पक्ष रखा. उन्होंने लिखा, 'कई मुश्किल परिस्थितियों में जब मेरी अंतरात्मा भी सहमत नहीं थी. तब भी मैंने टेलीविजन पर बहस और मीडिया मंचों पर सार्वजनिक रूप से पार्टी का पक्ष रखा और इसके लिए मुझे आम लोगों की आलोचना का सामना करना पड़ा.'

उन्होंने आगे कहा, 'लेकिन अब जब आरजी कर घटना, नौकरी घोटाले और विभिन्न अनैतिक कार्यों व भ्रष्टाचार के कारण लोगों ने हमें नकार दिया है, तो मेरी अंतरात्मा मुझे प्रवक्ता के रूप में इन बातों का समर्थन करने की अनुमति नहीं देती.'

आरजी कर कांड को लेकर बढ़े मतभेद

पिछले साल कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद महिला डॉक्टर से कथित बलात्कार और हत्या के मामले ने पूरे राज्य में भारी आक्रोश पैदा कर दिया था. इस घटना के बाद संस्थान में भ्रष्टाचार और विरोध की आवाज दबाने के आरोप भी लगे थे.

आरजी कर के पूर्व छात्र रहे शांतनु सेन उन चुनिंदा तृणमूल नेताओं में शामिल थे जिन्होंने सार्वजनिक रूप से संस्थान में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए थे.

पार्टी ने किया था निलंबित

आरजी कर मामले में दिए गए बयानों के बाद तृणमूल नेतृत्व असहज हो गया था. पार्टी ने उन्हें 'पार्टी विरोधी गतिविधियों' का आरोप लगाते हुए निलंबित कर दिया था. साथ ही उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से भी हटा दिया गया था, हालांकि बाद में उन्हें बहाल कर दिया गया.

जांच में सहयोग देने की बात

बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद शांतनु सेन ने सोशल मीडिया पर भारतीय जनता पार्टी की नई सरकार और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को बधाई दी थी, जिससे तृणमूल खेमे में असहजता बढ़ गई थी.

बुधवार को उन्होंने कहा कि आरजी कर बलात्कार-हत्या मामले से जुड़ी किसी भी जांच में वह नई सरकार को पूरा सहयोग देने के लिए तैयार हैं.

कई नेताओं ने जताई नाराजगी

तृणमूल कांग्रेस में हाल के दिनों में कई नेताओं ने पार्टी की कार्यशैली को लेकर नाराजगी जाहिर की है. पार्टी प्रवक्ता और पार्षद अरूप चक्रवर्ती ने कोलकाता नगर निगम की लोक लेखा समिति से इस्तीफा देने के बाद प्रवक्ता पद भी छोड़ दिया.

वहीं पार्षद सुशांत घोष ने नगर अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. लोकसभा सदस्य काकोली घोष दस्तीदार ने भी हाल ही में संगठन के सभी पदों से इस्तीफा देकर पार्टी नेतृत्व के भीतर कामकाज के तरीके पर सवाल उठाए थे.

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