जेल में बंद उमर खालिद को मिला न्यूयॉर्क मेयर का समर्थन, जोहरान ममदानी का लिखा पत्र हुआ सार्वजनिक
न्यूयॉर्क के भारतीय मूल के मेयर जोहरान ममदानी का उमर खालिद को लिखा पत्र सार्वजनिक होने से मामला फिर चर्चा में आया है. इस बीच एक अमेरिकी सांसद ने लंबी हिरासत पर चिंता भी जताई है.

न्यूयॉर्क शहर के भारतीय मूल के मेयर जोहरान ममदानी ने जेल में बंद सामाजिक कार्यकर्ता उमर खालिद को अपने हाथों से लिखा हुआ पत्र भेजा. यह पत्र उन्होंने खालिद के माता-पिता को सौंपा था, जिसे हाल ही में सार्वजनिक किया गया है. इस पत्र के सामने आने के बाद उमर खालिद का मामला भी एक बार फिर चर्चा में आ गया है.
अपने पत्र में जोहरान ममदानी ने उमर खालिद को लिखा कि वह अक्सर उनके उन विचारों को याद करते हैं, जिनमें उन्होंने (उमर खालिद) कड़वाहट से दूर रहने और हालात को खुद पर हावी न होने देने की बात कही थी. ममदानी ने पत्र में यह भी लिखा कि उन्हें उमर के माता-पिता से मिलकर बहुत खुशी हुई और सभी लोग उमर के बारे में लगातार सोचते रहते हैं.
शपथ ग्रहण के दिन सामने आया पत्र
यह पत्र दिसंबर 2025 में लिखा गया था, जब ममदानी अमेरिका दौरे के दौरान उमर खालिद के माता-पिता से मिले थे। उसी मुलाकात के दौरान उन्होंने यह नोट उन्हें सौंपा था. गुरुवार को, जिस दिन जोहरान ममदानी ने न्यूयॉर्क के मेयर के रूप में शपथ ली, उसी दिन उमर खालिद की साथी बूनोज्योत्सना लाहिड़ी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस पत्र की तस्वीर साझा की. इसके बाद यह पत्र सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया.
अमेरिका यात्रा पर गए थे उमर के माता-पिता
बूनोज्योत्सना लाहिड़ी ने बताया कि उमर खालिद के माता-पिता, साहिबा खानम और सैयद कासिम रसूल इलियास, अमेरिका अपनी सबसे छोटी बेटी की शादी से पहले गए थे. उनकी एक बड़ी बेटी अमेरिका में रहती है, जो शादी में भारत नहीं आ सकी थी. इसी वजह से माता-पिता उससे मिलने अमेरिका गए थे.
लाहिड़ी के अनुसार, अमेरिका में उनकी मुलाकात ममदानी और कुछ अन्य लोगों से हुई, जिनके साथ उन्होंने काफी समय बिताया. उसी दौरान ममदानी ने यह पत्र लिखा.
अंतरिम जमानत और पारिवारिक समय
उमर खालिद 2020 से गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत जेल में बंद हैं. दिसंबर 2025 में उन्हें अपनी बहन की शादी में शामिल होने के लिए अंतरिम जमानत मिली थी. हालांकि, जमानत की शर्तों के चलते वह घर से बाहर नहीं जा सकते थे.
इस दौरान उन्होंने पूरा समय परिवार के साथ बिताया. लाहिड़ी ने बताया कि उमर को घर का बना खाना मिलता था और उनकी मां अक्सर उन्हें अपने हाथों से खाना खिलाती थीं. वह अपने भतीजे-भतीजियों के साथ भी काफी समय बिताते थे. लेकिन यह समय जल्दी बीत गया और जमानत खत्म होने के बाद उन्हें फिर से जेल लौटना पड़ा.
अमेरिकी सांसद ने जताई चिंता
इस बीच, अमेरिका के कांग्रेस सदस्य जेम्स पी. मैकगवर्न ने भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा को पत्र लिखकर 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में मुकदमे से पहले लंबी हिरासत पर चिंता जताई है. अपने पत्र में मैकगवर्न ने कहा कि उमर खालिद और अन्य मुस्लिम मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर हिंसा भड़काने के आरोप लगाए गए हैं, लेकिन कई मानवाधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं.
उन्होंने यह भी लिखा कि स्वतंत्र जांच में उमर खालिद को किसी भी आतंकवादी गतिविधि से जोड़ने के ठोस सबूत नहीं मिले हैं. मैकगवर्न ने अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला देते हुए कहा कि भारत को निष्पक्ष और समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करना चाहिए और दोष सिद्ध होने तक किसी को भी निर्दोष माना जाना चाहिए.


