बांदा कोर्ट का बड़ा फैसला: बच्चों से दरिंदगी कर डार्क वेब पर वीडियो बेचने वाले दंपति को फांसी की सजा
उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग के जूनियर इंजीनियर राम भवन और उनकी पत्नी दुर्गावती को एक बेहद सनसनीखेज मामले में दोषी ठहराया गया है. बच्चों के साथ क्रूर यौन शोषण कर उनके वीडियो बनाकर विदेशों में बेचने के कई गंभीर अपराधों के तहत कोर्ट ने उन्हें सजा सुनाई है.

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में छह साल पहले हुए एक बेहद दिल दहला देने वाले मामले में विशेष अदालत ने शुक्रवार को एक दंपति को मौत की सजा सुनाई है. यह दंपति नाबालिग बच्चों के अश्लील वीडियो बनाकर डार्क वेब पर बेचने के दोषी पाए गए. बांदा की पॉक्सो कोर्ट ने सुनवाई के बाद राम भवन और उनकी पत्नी दुर्गावती को फांसी की सजा सुनाई, जिससे क्षेत्र के सबसे भयावह बाल शोषण मामलों में से एक को न्याय मिला.
कोर्ट ने दोनों को भारतीय दंड संहिता पॉक्सो एक्ट और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की कई धाराओं के तहत दोषी ठहराया. अपराध सुप्रीम कोर्ट द्वारा धारा 377 को पढ़ने से पहले के होने के कारण आईपीसी की धारा 377 भी लगाई गई.
मौत की सजा और मुआवजे का आदेश
अदालत ने दोनों दोषियों को फांसी तक लटकाए जाने की सजा सुनाई. साथ ही राज्य और केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि प्रत्येक पहचाने गए पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाए.
सीबीआई जांच और गिरफ्तारी
यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो ने जांचा था. अक्टूबर 2020 में बांदा, चित्रकूट और आसपास के जिलों में बाल यौन शोषण की रिपोर्ट्स के बाद दंपति को गिरफ्तार किया गया.
बच्चों को निशाना बनाने की क्रूर रणनीति
जांचकर्ताओं के अनुसार आरोपी राम भवन और दुर्गावती ने पड़ोस और विस्तृत दायरे से 5 से 16 साल के बच्चों को निशाना बनाया. उन्हें लालच देकर घर बुलाया, यौन शोषण किया और मोबाइल फोन तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से विडियो रिकॉर्ड किया.
घर से जब्त सामग्री
आरोपियों के घर की तलाशी में सीबीआई ने 8 लाख रुपये नकद, 12 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, एक हार्ड डिस्क और छह पेन ड्राइव बरामद किए गए.
फॉरेंसिक जांच के नतीजे
जब्त डिवाइसों की फॉरेंसिक जांच से बड़ी मात्रा में बाल यौन शोषण सामग्री की पुष्टि हुई. वीडियो और तस्वीरें एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म और डार्कनेट चैनलों के जरिए खरीदारों, जिसमें विदेशी नागरिक भी शामिल थे.
पीड़ितों की संख्या
प्रारंभिक जांच में 33 बाल पीड़ितों की पहचान हुई. चार्जशीट में 4 से 22 साल के व्यक्तियों के बयान भी शामिल थे. दुर्गावती पर जांच के दौरान गवाहों को प्रभावित करने का भी आरोप लगा. ससाथ ही मामले में दिल्ली से एक व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया गया है और आगे की जांच जारी है.
फैसले का महत्व
यह फैसला ऑनलाइन संगठित बाल शोषण की गंभीरता को रेखांकित करता है और ऐसे अपराधों में उत्पादन तथा वितरण करने वालों के लिए कठोर सजा का संकेत देता है.


