सुप्रीम कोर्ट के झटके के बाद ट्रंप का नया दांव, दुनिया भर पर लगाया 10% टैरिफ
सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 1974 के कानून की धारा 122 के तहत सभी देशों पर 10% वैश्विक टैरिफ लागू किया. प्रशासन ने संकेत दिया कि आगे और सख्त व्यापारिक कदम भी उठाए जा सकते हैं.

नई दिल्ली: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से झटका मिलने के कुछ ही घंटों बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सभी देशों से आने वाले आयात पर 10% वैश्विक टैरिफ लगाने का नया कार्यकारी आदेश जारी कर दिया. इस फैसले ने साफ कर दिया है कि अदालत की रोक के बावजूद ट्रंप अपनी व्यापार नीति से पीछे हटने के मूड में नहीं हैं. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत वाले फैसले में कहा था कि राष्ट्रपति अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) के तहत बिना कांग्रेस की मंजूरी के व्यापक टैरिफ लागू नहीं कर सकते.
वहीं, अदालत के इस निर्णय को ट्रंप ने “बेहद निराशाजनक” बताया और खुलकर असहमति जताई. ट्रंप ने तुरंत दूसरा रास्ता अपनाते हुए 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 के तहत 10% का वैश्विक टैरिफ लागू कर दिया. यह शुल्क लगभग तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है और अधिकतम पांच महीने यानी करीब 150 दिनों तक लागू रह सकता है.
धारा 122 के तहत अस्थायी लेकिन असरदार कदम
ट्रंप ने कहा कि इस पांच महीने की अवधि में प्रशासन अलग-अलग देशों पर उचित दर तय करने के लिए जांच करेगा. उनका संकेत था कि आगे चलकर कुछ देशों पर ज्यादा सख्त शुल्क लगाए जा सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि कानून उन्हें कई विकल्प देता है और जरूरत पड़ने पर दरें और बढ़ाई जा सकती हैं.
धारा 122 के तहत अधिकतम 15% तक टैरिफ लगाया जा सकता है. हालांकि, ट्रंप ने साफ किया कि यह केवल एक अस्थायी व्यवस्था है और भविष्य में धारा 232 (राष्ट्रीय सुरक्षा) और धारा 301 (अनुचित व्यापार प्रथाओं) के तहत और कड़े कदम उठाए जा सकते हैं.
“हमारे पास कई विकल्प हैं”
पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास कई मजबूत विकल्प मौजूद हैं. उन्होंने दोहराया कि उनका मकसद अमेरिकी उद्योग और अर्थव्यवस्था को विदेशी देशों की अनुचित व्यापार नीतियों से बचाना है. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने बताया कि धारा 301 के तहत नई जांचों का विवरण जल्द जारी किया जाएगा. उनके मुताबिक ये कदम कानूनी रूप से काफी मजबूत होंगे.
क्या रिफंड किया जाएगा टैरिफ राजस्व?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पिछले साल वसूले गए करीब 175 अरब डॉलर के टैरिफ राजस्व पर सवाल खड़े हो गए हैं. रिपोर्टों के अनुसार, यह राशि संभावित रिफंड के दायरे में आ सकती है. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अदालत ने धनवापसी को लेकर कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिया है और यह मुद्दा अभी विवाद में है.
उन्होंने माना कि यह कानूनी प्रक्रिया हफ्तों, महीनों या सालों तक चल सकती है. हालांकि, प्रशासन को उम्मीद है कि नए टैरिफ और विस्तारित प्रावधानों से राजस्व में होने वाली कमी की भरपाई हो जाएगी. ट्रेजरी के अनुमान के अनुसार, 2026 तक टैरिफ से होने वाली आय लगभग स्थिर रह सकती है.


