टैरिफ 10% से बढ़ाकर 15%...सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा फैसला, कहा- US को दशकों तक ठगा गया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के जवाब में सभी आयातों पर वैश्विक टैरिफ को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया. यह नया 15 प्रतिशत टैरिफ सेक्शन 122 के तहत तत्काल प्रभावी हुआ है.जो 150 दिनों तक लागू रह सकता है. इस कदम से वैश्विक व्यापार में फिर से अनिश्चितता बढ़ गई है.

नई दिल्ली : वॉशिंगटन से बड़ी खबर है जहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत को चौंकाते हुए आयात शुल्क में भारी बढ़ोतरी कर दी है. शनिवार को उन्होंने घोषणा की कि सभी देशों से आने वाले सामान पर अब 10 के बजाय 15 प्रतिशत टैरिफ लगेगा. यह कदम सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के ठीक बाद आया है जिसमें उनके पुराने टैरिफ प्रोग्राम को अवैध बताया गया था. ट्रंप के इस आक्रामक फैसले से वैश्विक अर्थव्यवस्था में अब नई हलचल पैदा हो गई है.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनके टैरिफ प्रोग्राम को रद्द किए जाने से राष्ट्रपति ट्रंप काफी नाराज दिखे. कोर्ट ने आपातकालीन कानून के तहत शुल्कों को अवैध ठहराया था. इसके जवाब में ट्रंप ने शुक्रवार को पहले 10 प्रतिशत के तत्काल शुल्क का आदेश दिया. उनका मानना है कि अदालत के फैसले ने भले ही पुरानी व्यवस्था को चोट पहुँचाई हो, लेकिन वे हार नहीं मानेंगे. उन्होंने तुरंत एक नए और कानूनी रूप से मजबूत विकल्प की तलाश शुरू कर दी है.
15 प्रतिशत का नया वैश्विक प्रहार
शनिवार को ट्रंप ने एक कदम और आगे बढ़ते हुए टैरिफ की दर को 15 प्रतिशत के उच्चतम स्तर पर पहुँचा दिया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि वे उन देशों पर शुल्क बढ़ा रहे हैं जो दशकों से अमेरिका का फायदा उठाते आ रहे हैं. ट्रंप ने कहा कि उनके आने से पहले किसी ने भी इन देशों से कोई हिसाब नहीं मांगा था. अब वे कानून द्वारा अनुमत पूरी 15 प्रतिशत सीमा का तत्काल उपयोग करेंगे.
150 दिनों की अस्थायी समय-सीमा
अमेरिकी राष्ट्रपति के पास अधिकार है कि वे बिना किसी लंबी प्रक्रिया के 150 दिनों के लिए 15 प्रतिशत तक लेवी लगा सकते हैं. ट्रंप इसी समय का उपयोग अपनी भावी रणनीति बनाने के लिए करना चाहते हैं. इस 150 दिनों की अवधि के दौरान उनका प्रशासन पूरी शक्ति के साथ नए और 'कानूनी रूप से मान्य' नियमों पर काम करेगा. यह एक अस्थायी समाधान है ताकि अमेरिकी उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा और असमान लाभ से बचाया जा सके.
नई कानूनी रणनीति पर काम
ट्रंप प्रशासन के भीतर अब ऐसे टैरिफ बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है जिन्हें भविष्य में कानूनी चुनौतियों का सामना न करना पड़े. राष्ट्रपति ने साफ कर दिया है कि वे केवल शुल्क बढ़ाकर शांत नहीं बैठेंगे, बल्कि इसे स्थायी बनाने के लिए नए नियमों का सेट जारी करेंगे. व्हाइट हाउस के विशेषज्ञ अब पुराने कानूनों और अदालती मिसालों का अध्ययन कर रहे हैं. इसका उद्देश्य अमेरिका को वैश्विक व्यापारिक मंच पर फिर से शक्तिशाली स्थिति में लाना है.
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संभावित असर
ट्रंप के इस फैसले का सीधा असर भारत और यूरोप सहित तमाम बड़े व्यापारिक भागीदारों पर पड़ेगा. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम को फिर से अदालतों में चुनौती दी जा सकती है, लेकिन तत्काल रूप से इससे आयातित सामान महंगा हो जाएगा. वैश्विक कूटनीति में ट्रंप की इस 'अमेरिका फर्स्ट' नीति ने एक बार फिर व्यापार युद्ध की संभावनाओं को हवा दी है. अब सभी की नजरें अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं और अमेरिकी बाजारों में होने वाले बदलावों पर टिकी हैं.


