Sikkim Avalanche: बर्फीले तूफान में शहीद हुए लांसनायक विकास कुमार, बेटे के पहले जन्मदिन से पहले तिरंगे में लौटे

सिक्किम में ड्यूटी के दौरान बर्फीले तूफान की चपेट में आकर उत्तराखंड के जवान विकास कुमार शहीद हो गए. बेटे के पहले जन्मदिन से पहले उनका तिरंगे में घर लौटना पूरे देश को भावुक कर गया है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: देश की रक्षा करते हुए एक और वीर सपूत ने अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ निवासी 24 वर्षीय लांसनायक विकास कुमार सिक्किम में ड्यूटी के दौरान बर्फीले तूफान की चपेट में आकर शहीद हो गए. इस खबर के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है.

विकास कुमार का पार्थिव शरीर गुरुवार को उनके गृह जनपद लाए जाने की संभावना है. जिस पिता ने अपने बेटे के पहले जन्मदिन पर घर लौटने का सपना देखा था, वह अब तिरंगे में लिपटकर घर आएंगे. यह घटना हर किसी की आंखें नम कर रही है.

गश्त के दौरान हिमस्खलन का शिकार

पिथौरागढ़ के गणकोट गांव निवासी लांसनायक विकास कुमार 19 कुमाऊं रेजीमेंट में तैनात थे. जानकारी के अनुसार, 29 मार्च को वह अपने दो साथियों के साथ सीमा क्षेत्र में गश्त पर निकले थे.

इसी दौरान अचानक हुए हिमस्खलन की चपेट में आकर वह शहीद हो गए. बताया जा रहा है कि उनका पार्थिव शरीर दो दिनों तक बर्फ में दबा रहा. अब सैन्य सम्मान के साथ उनके गांव लाने की तैयारी की जा रही है.

बेटे के जन्मदिन का सपना अधूरा

यह घटना दिल को झकझोर देने वाली है. विकास कुमार का बेटा अभी एक साल का भी नहीं हुआ है. चार जून को उसका पहला जन्मदिन है, जिसे लेकर विकास बेहद उत्साहित थे.

परिवार के अनुसार, वह इस खास मौके पर घर आने की योजना बना रहे थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. अब उनका बेटा बिना पिता के ही अपना पहला जन्मदिन मनाएगा.

2023 में हुई थी शादी

विकास कुमार सेना में वर्ष 2017-18 में भर्ती हुए थे. साल 2023 में उनकी शादी प्रीति से हुई थी. उनका एक छोटा बेटा पृथ्विक है, जो अभी शैशव अवस्था में है.

विकास अपने परिवार के साथ समय बिताने के लिए अप्रैल के अंत तक घर लौटने वाले थे, लेकिन यह इंतजार अब कभी पूरा नहीं हो पाएगा.

अप्रैल में लौटने का था वादा

परिजनों के मुताबिक, विकास ने कहा था कि वह अप्रैल के आखिरी सप्ताह तक घर लौटेंगे और पूरे परिवार के साथ मिलकर बेटे का पहला जन्मदिन मनाएंगे.

लेकिन नियति ने उन्हें यह मौका नहीं दिया. अब परिवार को उनके बिना ही आगे की जिंदगी बितानी होगी.

शहादत की खबर से गांव में मातम

विकास कुमार के शहीद होने की खबर मिलते ही गणकोट गांव और आसपास के क्षेत्रों में गहरा शोक छा गया. पूर्व सैनिक संगठन ने भी उनके बलिदान को नमन करते हुए कहा कि उन्होंने पूरे क्षेत्र का सिर गर्व से ऊंचा किया है.

परिवार को देर से दी गई जानकारी

सेना की ओर से विकास के शहीद होने की सूचना मंगलवार शाम करीब तीन बजे मिली थी. हालांकि, उनके माता-पिता और पत्नी को यह खबर तुरंत नहीं दी गई.

बुधवार को उन्हें इस दुखद घटना की जानकारी दी गई, जिसके बाद परिवार में मातम पसर गया. उनकी मां मंजू देवी स्थानीय स्कूल में भोजन माता के रूप में कार्यरत हैं, जबकि उनके भाई नीरज दिल्ली से घर लौट आए हैं.

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