डकैतों को हीरो बनाना बंद करो, वाराणसी से योगी का फिल्म इंडस्ट्री को सख्त और सीधा संदेश

वाराणसी दौरे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फिल्मों को लेकर बड़ा बयान दिया, कहा डकैतों को हीरो बनाना गलत है और इससे युवा पीढ़ी पर नकारात्मक असर पड़ता है

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने वाराणसी में फिल्मों को लेकर साफ और सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि फिल्मों में अपराधियों को नायक के रूप में दिखाना समाज के लिए ठीक नहीं है। यह सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि समाज को दिशा देने का माध्यम है। ऐसे में फिल्मों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि गलत किरदारों को महिमामंडित करना खतरनाक हो सकता है।

क्या डकैतों को हीरो बनाना गलत है?

सीएम योगी ने कहा कि जब फिल्मों में डकैतों को हीरो दिखाया जाता है तो युवा उन्हें अपना आदर्श मानने लगते हैं। इससे समाज में गलत संदेश जाता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी अपराधी को नायक बनाकर पेश नहीं करना चाहिए। इससे आने वाली पीढ़ियों की सोच प्रभावित होती है। उन्होंने इसे गंभीर चिंता का विषय बताया।

क्या युवाओं पर पड़ता है सीधा असर?

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा वही सीखते हैं जो उन्हें दिखाया जाता है। अगर फिल्मों में गलत उदाहरण दिए जाएंगे तो उसका असर सीधे युवाओं पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पहले भी ऐसी फिल्मों के कारण कई पीढ़ियां गलत दिशा में गई हैं। इसलिए फिल्म निर्माताओं को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।

क्या ‘धुरंधर 2’ पर इशारा था?

अपने बयान में सीएम योगी ने बिना नाम लिए एक फिल्म का जिक्र किया, जिसे ‘धुरंधर 2’ से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज के समय में देश ने डकैतों को ठुकरा दिया है। लेकिन पहले फिल्मों में उल्टा दिखाया जाता था। अच्छे पात्रों को खलनायक और बुरे लोगों को नायक बनाया जाता था। इसका असर समाज पर साफ दिखा।

क्या फिल्मों से समाज को दिशा मिलती है?

सीएम योगी ने कहा कि फिल्में सिर्फ कहानी नहीं होतीं, बल्कि समाज को दिशा देने का बड़ा मंच होती हैं। इसलिए जरूरी है कि ऐसी फिल्में बनें जो देश और समाज के लिए प्रेरणा बनें। उन्होंने निर्माताओं और कलाकारों से अपील की कि वे जिम्मेदारी के साथ कंटेंट तैयार करें।

क्या वाराणसी कार्यक्रम में और क्या कहा गया?

सीएम योगी वाराणसी में सम्राट विक्रमादित्य पर आधारित कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने भारत की सांस्कृतिक परंपराओं का जिक्र किया। उन्होंने राम-लक्ष्मण और कृष्ण-बलराम की जोड़ी का उदाहरण दिया। साथ ही संत भर्तृहरि और विक्रमादित्य के संबंध को भी बताया।

क्या काशी और उज्जैन का संबंध बताया?

मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी और उज्जैन का गहरा आध्यात्मिक संबंध है। काशी में संत भर्तृहरि की साधना स्थली है जबकि उज्जैन सम्राट विक्रमादित्य की कर्मभूमि रही है। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा में ऐसे उदाहरण समाज को जोड़ने का काम करते हैं और प्रेरणा देते हैं।

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