20 साल में पहली बार अमेरिका को लगा बड़ा झटका... ईरान युद्ध में 365 सैनिक घायल, 13 की मौत

ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका को बड़ा नुकसान हुआ है, जहां 365 सैनिक घायल और 13 की मौत हुई है. दो विमानों के गिरने और पायलट के लापता होने से हालात और गंभीर हो गए हैं.

Shraddha Mishra

ईरान के साथ जारी युद्ध में अमेरिका को ऐसा झटका लगा है, जिसने पिछले दो दशकों के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है. लगातार बढ़ते नुकसान और नई घटनाओं ने इस संघर्ष को और गंभीर बना दिया है. हालात ऐसे हैं कि अब यह युद्ध सिर्फ सैन्य ताकत का प्रदर्शन नहीं, बल्कि रणनीति और नियंत्रण की परीक्षा बन गया है.

अमेरिकी रक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस युद्ध में अब तक 365 अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं, जबकि 13 सैनिकों की मौत हो गई है. घायल सैनिकों में सेना, नौसेना, वायुसेना और मरीन के जवान शामिल हैं. इनमें सबसे ज्यादा संख्या थल सेना के जवानों की है, जबकि अन्य सेनाओं के भी कई सैनिक इस संघर्ष में घायल हुए हैं. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि हाल में हुए बचाव अभियानों के दौरान घायल हुए सैनिक भी इसी आंकड़े में शामिल हैं या नहीं.

20 साल बाद ऐसा नुकसान

इस युद्ध में सबसे बड़ा झटका तब लगा जब ईरान ने अमेरिकी विमानों को निशाना बनाया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने दो अमेरिकी लड़ाकू विमानों को मार गिराने का दावा किया है. बताया जा रहा है कि इनमें से एक विमान का पायलट सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि दूसरा अब भी लापता है. उसकी तलाश के लिए बचाव अभियान जारी है, जो काफी जोखिम भरा माना जा रहा है.

विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले 20 वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है जब विदेशी जमीन पर अमेरिकी सेना के दो विमान गिराए गए हों. इससे अमेरिका की हवाई ताकत और सुरक्षा दावों पर सवाल उठने लगे हैं. इससे पहले 2003 के इराक युद्ध के दौरान एक ए-10 विमान गिराया गया था, लेकिन मौजूदा स्थिति उससे भी ज्यादा गंभीर मानी जा रही है.

नेताओं के दावों में विरोधाभास

एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि ईरान कमजोर हो चुका है और युद्ध में अमेरिका की स्थिति मजबूत है. उन्होंने हाल ही में कहा था कि अमेरिका ने ईरान को भारी नुकसान पहुंचाया है और जल्द ही अपने लक्ष्य हासिल कर लेगा. वहीं दूसरी ओर, ईरान लगातार जवाबी कार्रवाई करने का दावा कर रहा है और खुद को मजबूत स्थिति में बता रहा है. दोनों देशों के बयान इस संघर्ष को और उलझा रहे हैं.

बचाव अभियान बना चुनौती

लापता पायलट को खोजने के लिए चलाया जा रहा अभियान भी आसान नहीं है. दुश्मन क्षेत्र में यह ऑपरेशन काफी जोखिम भरा है और इसमें शामिल टीमों को लगातार खतरे का सामना करना पड़ रहा है. इन घटनाओं के बाद यह साफ हो गया है कि यह युद्ध जल्द खत्म होने वाला नहीं है. दोनों पक्ष अपनी-अपनी स्थिति मजबूत करने में लगे हैं, जिससे तनाव लगातार बढ़ रहा है.

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