क्या होर्मुज के बाद बाब-अल-मंडेब पर ईरान की नजर? शीर्ष अधिकारी के बयान से बढ़ी वैश्विक चिंता

होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव के बीच अब बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य को लेकर भी नई आशंकाएं सामने आ रही हैं. ईरान के शीर्ष नेता के संकेतों ने वैश्विक आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी व्यवधानों के बीच ईरान ने अब एक और अहम समुद्री मार्ग बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य की ओर ध्यान देने के संकेत दिए हैं. इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है.

ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ की हालिया टिप्पणियां ऐसे समय में सामने आई हैं, जब 28 फरवरी को ईरान पर हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों के बाद से होर्मुज के रास्ते समुद्री गतिविधियां प्रभावित हैं. इस स्थिति ने न केवल क्षेत्रीय तनाव बढ़ाया है, बल्कि वैश्विक बाजारों पर भी असर डाला है.

होर्मुज के बाद बाब-अल-मंडेब पर फोकस

ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य पर प्रभाव बनाए रखने के बाद अब बाब-अल-मंडेब की ओर संकेत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बन गया है. यह मार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है.

क्या है बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य?

बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है. इसके एक किनारे पर यमन स्थित है, जो इसे रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बनाता है.

हौथी विद्रोहियों की धमकी से बढ़ा खतरा

यमन के हौथी विद्रोहियों, जिन्हें ईरान समर्थक माना जाता है, ने इस मार्ग पर जहाजरानी बाधित करने की चेतावनी दी है. अक्टूबर 2023 में गाजा संघर्ष शुरू होने के बाद से हौथी बलों ने कई बार लाल सागर और अदन की खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया है.

मिसाइल और ड्रोन हमलों से बढ़ी अस्थिरता

हौथी विद्रोही मिसाइल, ड्रोन और विस्फोटक नौकाओं का इस्तेमाल कर जहाजों पर हमले कर रहे हैं. उनका दावा है कि ये हमले इजरायल से जुड़े जहाजों को लक्ष्य बनाकर किए जा रहे हैं.

विश्लेषकों की चेतावनी

विशेषज्ञों का मानना है कि बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य अमेरिका-ईरान संघर्ष का अगला बड़ा केंद्र बन सकता है. खासतौर पर 28 मार्च को हौथियों द्वारा इजरायल की ओर मिसाइल दागे जाने के बाद यह खतरा और बढ़ गया है.

पहले भी रहा है अस्थिरता का केंद्र

यमन की रणनीतिक स्थिति के कारण यह क्षेत्र पहले भी कई बार अशांति का केंद्र रहा है. 2023 के अंत और 2024 के दौरान हौथी हमलों के कारण लाल सागर में जहाजरानी प्रभावित हुई थी.

हालांकि फिलहाल इस जलडमरूमध्य पर औपचारिक नाकाबंदी नहीं है, लेकिन किसी भी प्रकार की बाधा का असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा बाजारों पर गंभीर रूप से पड़ सकता है.

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