पेमेंट विवाद में फंसा ईरानी तेल? भारत सरकार ने जहाज के चीन मुड़ने की खबरों को बताया भ्रामक
ईरानी तेल से भरे जहाज के भारत की बजाय चीन की ओर मुड़ने की खबरों पर सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये दावे पूरी तरह गलत हैं और देश की ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित है.

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरानी कच्चे तेल को लेकर सामने आई खबरों पर केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है. हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया था कि ईरानी तेल से भरा एक जहाज पेमेंट से जुड़ी समस्याओं के चलते भारत के बजाय चीन की ओर मोड़ दिया गया.
हालांकि, सरकार ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि भारत के लिए आने वाले किसी भी ईरानी तेल जहाज को पेमेंट कारणों से डायवर्ट नहीं किया गया है और देश की ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है.
सरकार ने बताया- खबरें पूरी तरह गलत
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि 'पेमेंट से जुड़ी दिक्कतों' के कारण जहाज के मार्ग बदलने की खबरें भ्रामक हैं. बयान में कहा गया कि ईरानी कच्चे तेल के आयात में किसी भी प्रकार की भुगतान बाधा नहीं है और ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है जिसमें भारत आ रहा जहाज चीन की ओर मोड़ा गया हो.
भारत के पास कई स्रोत, कंपनियों को पूरी छूट
सरकार ने यह भी बताया कि भारत 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल आयात करता है. तेल कंपनियों को अपने व्यापारिक निर्णयों के अनुसार अलग-अलग स्रोतों से तेल खरीदने की स्वतंत्रता है, जिससे आपूर्ति पर किसी एक देश का दबाव नहीं पड़ता.
कैसे काम करता है तेल का वैश्विक व्यापार
मंत्रालय ने समझाया कि तेल व्यापार में जहाजों के मार्ग में बदलाव असामान्य नहीं है. 'बिल ऑफ लैडिंग' में कई संभावित बंदरगाहों का उल्लेख होता है और कारोबारी जरूरतों के अनुसार जहाज बीच समुद्र में भी अपना रूट बदल सकते हैं.
अफवाहों से बचने की अपील
सरकार ने कहा कि आने वाले महीनों के लिए भारत की कच्चे तेल की जरूरतें पूरी तरह सुरक्षित हैं. एलपीजी सप्लाई को लेकर भी भ्रम दूर करते हुए बताया गया कि 'सी बर्ड' नामक जहाज, जिसमें करीब 44 TMT ईरानी एलपीजी था, 2 अप्रैल को मैंगलोर बंदरगाह पहुंच चुका है और वहां अनलोडिंग जारी है.
बयान में लोगों से अपील की गई है कि वे ऐसी अफवाहों पर ध्यान न दें.


