अमेरिकी ब्लॉकेड से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे 15 भारतीय जहाज, नौसेना कर रही एस्कॉर्ट
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने के बीच भारतीय जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, हालांकि भारतीय नौसेना लगातार उन्हें सुरक्षित निकालने में लगी है. अमेरिका-ईरान तनाव और हमलों की घटनाओं के चलते यह क्षेत्र वैश्विक तेल-गैस आपूर्ति के लिए बेहद संवेदनशील बन गया है, जिससे भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर का खतरा है.

होर्मुज जलडमरूमध्य में एक बार फिर तनाव काफी बढ़ गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर बड़ा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच हुई वार्ता के असफल रहने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है. इसके बाद अमेरिका की ओर से होर्मुज क्षेत्र पर नियंत्रण को लेकर दिए गए बयान ने अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी है.
भारत के समुद्री व्यापार पर असर
इस बीच भारत के समुद्री व्यापार पर भी असर देखने को मिल रहा है. 11 अप्रैल 2026 को भारतीय झंडा लगे एलपीजी टैंकर ‘जग विक्रम’ ने सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर लिया और अरब सागर में प्रवेश किया. इस जहाज में लगभग 20,400 टन एलपीजी और 24 क्रू सदस्य सवार थे. इसके 15 अप्रैल तक मुंबई पहुंचने की संभावना जताई जा रही है.
जहाजरानी मंत्रालय के अनुसार, फारस की खाड़ी के पश्चिमी हिस्से में अभी भी 15 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं. इनमें एलएनजी, एलपीजी, कच्चे तेल के टैंकर, कंटेनर जहाज, ड्रेजर और केमिकल कार्गो जहाज शामिल हैं. इन जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए भारतीय एजेंसियां लगातार प्रयास कर रही हैं.
विशेष टास्क फोर्स की तैनात
भारतीय नौसेना ने स्थिति को देखते हुए विशेष टास्क फोर्स तैनात की है. हालांकि नौसेना सीधे खाड़ी क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर रही, लेकिन वह होर्मुज से गुजरने वाले भारतीय जहाजों को नेविगेशन और कम्युनिकेशन सहायता प्रदान कर रही है. जैसे ही जहाज गल्फ ऑफ ओमान और उत्तरी अरब सागर में प्रवेश करते हैं, उन्हें नौसेना के युद्धपोतों द्वारा सुरक्षा एस्कॉर्ट दिया जाता है. इस पूरे ऑपरेशन की निगरानी शीर्ष स्तर पर प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और नौसेना प्रमुख द्वारा की जा रही है.
अब तक कई भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से इस संवेदनशील मार्ग को पार कर चुके हैं और विभिन्न बंदरगाहों पर पहुंच चुके हैं. शुरुआती दौर में जहां करीब 25 जहाज फंसे हुए थे, वहीं अब यह संख्या घटकर लगभग 15 रह गई है. यह राहत का संकेत माना जा रहा है, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है.
गुरुग्राम स्थित इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर इंडियन ओशन रीजन लगातार 24 घंटे समुद्री क्षेत्र की निगरानी कर रहा है. यह केंद्र 28 देशों के साथ समन्वय में काम करता है और रीयल-टाइम समुद्री सुरक्षा जानकारी साझा करता है. ताजा रिपोर्ट के अनुसार, हाल के दिनों में इस क्षेत्र में मिसाइल, ड्रोन और अन्य हमलों समेत कुल कई घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें कुछ लोगों की जान भी गई है. बढ़ते तनाव के कारण यह क्षेत्र अब दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक बन गया है.


