क्या नेतन्याहू के एक कॉल से फेल हुई शांति वार्ता? अब्बास अराघची ने बताई अंदर की कहानी

पाकिस्तान में हुई अमेरिका-ईरान हाईलेवल वार्ता 21 घंटे बाद भी बिना किसी समझौते के खत्म हो गई, मुख्य वजह यूरेनियम संवर्धन पर मतभेद रही. ईरान ने आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान इजरायल के हस्तक्षेप से चर्चा की दिशा बदल गई, जिससे समझौते की संभावना और कमजोर हो गई.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के उद्देश्य से पाकिस्तान में आयोजित उच्चस्तरीय वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई. लगभग 21 घंटे तक चली लंबी बातचीत के बावजूद दोनों देश कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनाने में असफल रहे. इस असफलता के बीच ईरान ने एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वार्ता के दौरान इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के एक फोन कॉल ने पूरी चर्चा की दिशा बदल दी.

सैयद अब्बास अराघची का दावा 

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने दावा किया कि बातचीत के बीच नेतन्याहू ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से संपर्क किया, जिसके बाद वार्ता का फोकस अमेरिका-ईरान संबंधों से हटकर इजरायल के हितों की ओर मुड़ गया. अराघची के अनुसार, अमेरिका ने बातचीत के दौरान वे लक्ष्य हासिल करने की कोशिश की, जिन्हें वह सैन्य कार्रवाई के जरिए प्राप्त नहीं कर सका.

उन्होंने यह भी कहा कि ईरान इस वार्ता में सकारात्मक सोच और ईमानदार इरादों के साथ शामिल हुआ था, लेकिन वेंस द्वारा इस्लामाबाद से रवाना होने से पहले की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस को उन्होंने अनावश्यक बताया. अराघची ने स्पष्ट किया कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस मामले में किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा.

वहीं, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल बिना किसी समझौते के पाकिस्तान से लौट गया. वेंस ने कहा कि अमेरिका ने अपनी ओर से अंतिम और सर्वोत्तम प्रस्ताव पेश किया था, लेकिन ईरान का यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम पर अडिग रुख समझौते में सबसे बड़ी बाधा बन गया.

इस्लामी क्रांति के बाद पहली प्रत्यक्ष उच्चस्तरीय बातचीत

गौरतलब है कि 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद यह दोनों देशों के बीच पहली प्रत्यक्ष उच्चस्तरीय बातचीत थी. यह वार्ता ऐसे समय में हुई जब क्षेत्र में दो सप्ताह के संघर्षविराम की घोषणा के चार दिन ही हुए थे. इससे पहले 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया था, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ा.

ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकिर गालिबफ ने भी अमेरिका पर भरोसा न जताते हुए कहा कि इस बातचीत में अमेरिका ईरान का विश्वास जीतने में विफल रहा. उन्होंने कहा कि ईरान ने सकारात्मक पहल की, लेकिन अमेरिकी पक्ष अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा. गालिबफ ने यह भी दोहराया कि ईरान अपने हितों की रक्षा के लिए कूटनीतिक और सैन्य दोनों विकल्पों को साथ लेकर आगे बढ़ेगा. हालांकि, नेतन्याहू के कथित हस्तक्षेप के आरोपों पर अब तक अमेरिका की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

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