होर्मुज पर तनाव के बीच फिर जागी उम्मीद, क्या पाकिस्तान करा पाएगा अमेरिका-ईरान में समझौता?

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए इस्लामाबाद में अहम बातचीत की तैयारी है. हालांकि कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं, लेकिन कूटनीतिक कोशिशें तेज हो गई.

Shraddha Mishra

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक बार फिर कूटनीति की हलचल तेज होती दिख रही है. दोनों देशों के रिश्तों में जमी बर्फ पिघलाने के लिए एक और अहम बातचीत की तैयारी हो रही है, जो आने वाले दिनों में क्षेत्र की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकती है. तनाव कम करने की कोशिशों के तहत अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का अगला दौर सोमवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित होने की संभावना जताई जा रही है. 

इस वार्ता से जुड़े ईरानी अधिकारियों ने CNN को जानकारी दी है कि दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल रविवार को इस्लामाबाद पहुंच सकते हैं. हालांकि, अभी तक अमेरिकी प्रशासन की ओर से इस बैठक को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन बैक-चैनल स्तर पर बातचीत जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं.

समझौते को लेकर दोनों देशों के अलग-अलग रुख

बातचीत को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद साफ नजर आ रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि समझौते की दिशा में कुछ प्रगति हो रही है. वहीं, ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात से इनकार किया है कि तेहरान किसी बड़े समझौते या रियायत के लिए तैयार है. ऐसे में यह स्पष्ट है कि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अब भी दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पाई है.

होर्मुज जलडमरूमध्य पर बना तनाव

इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर स्थिति अब भी संवेदनशील बनी हुई है. यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. हाल ही में यहां से जहाजों की आवाजाही सीमित देखी गई. ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि यह मार्ग व्यापारिक जहाजों के लिए खुला है, लेकिन ईरानी संसद के स्पीकर ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी नौसैनिक गतिविधियां कम नहीं कीं, तो इसे फिर से बंद किया जा सकता है. दूसरी ओर, ट्रंप ने दावा किया है कि यह जलमार्ग पूरी तरह सुरक्षित और खुला है.

मिडिल ईस्ट में कूटनीतिक गतिविधियां तेज

मिडिल ईस्ट में शांति स्थापित करने के प्रयास भी तेजी पकड़ रहे हैं. कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी और तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन ने अंताल्या डिप्लोमेसी फोरम के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की. इस मुलाकात में क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया गया.

इसी क्रम में पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने तेहरान जाकर ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गलीबफ से मुलाकात की. इस बैठक को अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को फिर से पटरी पर लाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.

पिछली वार्ता रही थी बेनतीजा

गौरतलब है कि 11-12 अप्रैल को इस्लामाबाद में आयोजित शांति वार्ता अमेरिका और ईरान के बीच 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद पहली उच्चस्तरीय आमने-सामने बातचीत थी. हालांकि, यह बैठक किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी थी, जिससे दोनों देशों के बीच दूरी बनी रही.

इजरायल-हिज़्बुल्लाह संघर्ष का असर

इस पूरे घटनाक्रम के बीच इजरायल और हिज़्बुल्लाह के बीच घोषित 10 दिनों का युद्धविराम काफी हद तक लागू होता दिख रहा है. हालांकि, लेबनान ने कुछ उल्लंघनों के आरोप भी लगाए हैं. यह मुद्दा भी अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली बातचीत में एक संवेदनशील विषय बना हुआ है.

पाकिस्तान की भूमिका पर टिकी नजरें

कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि इस समय पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है. इस्लामाबाद में प्रस्तावित यह वार्ता अगर सफल होती है, तो इससे न केवल अमेरिका और ईरान के रिश्तों में सुधार आ सकता है, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने की दिशा में भी सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं.

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