US-ईरान तनाव के बीच खामेनेई को सता रहा खौफ, 7 महीने में दूसरी बार हुए अंडरग्राउंड
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के एक बार फिर बंकर में छिपने की खबर से पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है. अमेरिकी धमकियों और हालिया अंतरराष्ट्रीय घटनाओं को देखते हुए ईरान ने इसे गंभीर सुरक्षा खतरा माना है. ईरानी नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि खामेनेई पर किसी भी हमले को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा.

नई दिल्ली : ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के एक बार फिर भूमिगत बंकर में शरण लेने की खबरों ने पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा दिया है. बताया जा रहा है कि अमेरिका की ओर से संभावित हमले और हत्या की धमकियों के बाद ईरानी नेतृत्व ने यह कदम उठाया है. बीते सात महीनों में यह दूसरी बार है जब खामेनेई को सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक जीवन से दूर रहना पड़ा है. इससे पहले जून 2025 में वे करीब तीन सप्ताह तक बंकर में छिपे रहे थे.
अमेरिकी धमकियों को ईरान ने लिया गंभीरता से
अमेरिका से ईरान की आशंका क्यों बढ़ी
ईरान की चिंता हाल की अंतरराष्ट्रीय घटनाओं से भी जुड़ी है. अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को काराकास से गिरफ्तार किए जाने की घटना ने तेहरान को चौंका दिया है. बताया जाता है कि मादुरो को उनके आवास से हिरासत में लिया गया और बाद में अमेरिका ले जाया गया. अमेरिका का दावा है कि मादुरो ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े थे. इस घटनाक्रम ने ईरान को यह संकेत दिया कि अमेरिका किसी भी देश के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ सीधी कार्रवाई कर सकता है.
तेहरान के पास गुप्त बंकर में रह रहे हैं खामेनेई
जून 2025 में जब ईरान पर इजराइल और अमेरिका के संयुक्त हमले हुए थे, उस दौरान भी खामेनेई तेहरान के आसपास स्थित एक सुरक्षित बंकर में चले गए थे. उस समय उनके परिवार के सदस्य भी उनके साथ थे. ईरानी सरकार ने कभी भी इन बंकरों के स्थान या संरचना को लेकर आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है, लेकिन माना जाता है कि ये अत्याधुनिक सुरक्षा से लैस हैं.
लंबे समय से सार्वजनिक जीवन से दूर सुप्रीम लीडर
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार 17 जनवरी को खामेनेई आखिरी बार सार्वजनिक रूप से दिखाई दिए थे. उस दिन उन्होंने अमेरिका और इजराइल की नीतियों की तीखी आलोचना की थी और हालिया संघर्षों में घायल हुए लोगों से मुलाकात भी की थी. इसके बाद से वे किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर नहीं आए हैं, जिससे बंकर में छिपे होने की अटकलें और मजबूत हो गई हैं.
अमेरिका के निशाने पर क्यों हैं खामेनेई
अयातुल्ला खामेनेई ईरान की सत्ता संरचना का केंद्र माने जाते हैं. देश की सैन्य, राजनीतिक और धार्मिक शक्तियां अंततः उन्हीं के नियंत्रण में हैं. ऐसे में ईरानी शासन को कमजोर करने के लिए उन्हें निशाना बनाना रणनीतिक रूप से अहम माना जाता है. इसके अलावा खामेनेई लंबे समय से अमेरिका के कट्टर विरोधी रहे हैं और 2016 की परमाणु संधि का भी उन्होंने खुलकर विरोध किया था. वे अक्सर अमेरिका को “महान शैतान” कहकर संबोधित करते रहे हैं.
ईरान के चारों ओर अमेरिकी घेराबंदी तेज
हालांकि ईरान में दिसंबर के अंत में शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब शांत हो चुके हैं, लेकिन अमेरिकी सैन्य दबाव लगातार बना हुआ है. अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है और यूएसएस अब्राहम जैसे युद्धपोतों को रणनीतिक समुद्री इलाकों में तैनात किया गया है. फ्लाइट रडार से जुड़ी जानकारियों के अनुसार, एफ-15 लड़ाकू विमानों की तैनाती भी क्षेत्रीय सहयोगियों के जरिए की गई है. जून 2025 में हुए हमलों में जॉर्डन की भूमिका को देखते हुए ईरान इस घेराबंदी को बेहद गंभीर खतरे के रूप में देख रहा है.
ईरान-अमेरिका संबंध बेहद नाजुक
खामेनेई का दोबारा बंकर में जाना इस बात का संकेत है कि ईरान-अमेरिका संबंध बेहद नाजुक दौर में हैं. यदि किसी भी स्तर पर सीधी कार्रवाई होती है, तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया पर पड़ सकता है. फिलहाल दुनिया की नजरें तेहरान और वॉशिंगटन की अगली चाल पर टिकी हुई हैं.


