रूसी तेल खरीदने की छूट केवल भारत...मिडिल ईस्ट में चल रहे जंग के बीच यूरोपीय देशों से बोले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप

अमेरिका ने यूरोपीय देशों को स्पष्ट किया है कि रूसी तेल खरीदने की विशेष छूट केवल भारत को दी गई है. ईरान युद्ध के कारण उपजे वैश्विक तेल संकट को देखते हुए यह रणनीतिक फैसला लिया गया है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली: वैश्विक ऊर्जा बाजार में मचे हड़कंप के बीच अमेरिका ने एक बड़ा कूटनीतिक दांव चला है. वॉशिंगटन ने अपने यूरोपीय सहयोगियों को दोटूक शब्दों में कहा है कि रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी छूट केवल और केवल भारत के लिए है. ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण जंग ने खाड़ी देशों से होने वाली तेल आपूर्ति को लगभग ठप कर दिया है. जिससे भारत जैसे बड़े उपभोक्ता के सामने गहरा संकट खड़ा हो गया है. इसी दबाव को कम करने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप ने यह विशेष रियायत दी है.

होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया 

बता दें कि ईरान ने पश्चिमी देशों के हमलों के जवाब में तेल व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को बंद कर दिया है. इस रणनीतिक मार्ग की बंदी से सऊदी अरब और इराक जैसे देशों से भारत आने वाला कच्चा तेल पूरी तरह अटक गया है. दुनिया भर में तेल और गैस की किल्लत बढ़ने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है. इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने की 30 दिनों की विशेष छूट प्रदान की है. जिससे भारतीय रिफाइनरियों को बड़ी राहत मिली है.

EU को अमेरिका का दो टूक जवाब

जी-7 देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक में अमेरिका ने स्पष्ट संदेश दिया कि यह छूट केवल विशिष्ट परिस्थितियों के लिए है. यूरोपीय संघ के देशों को इस तरह की कोई रियायत नहीं दी जाएगी. अमेरिका ने संकेत दिया कि यदि भविष्य में प्रतिबंधों में और ढील दी भी जाती है. तो उसका दायरा भारत तक ही सीमित रहेगा. यूरोपीय आयोग के आयुक्त वाल्दिस डोम्ब्रोवस्किस ने बताया कि इस सीमित छूट से रूस की कुल कमाई पर कोई विशेष असर पड़ने की उम्मीद नहीं है क्योंकि यह समयबद्ध है.

ट्रंप और पुतिन की अहम बातचीत

तेल की आसमान छूती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से सीधी बातचीत की है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप तेल से जुड़े कुछ कड़े प्रतिबंधों को हटाने पर विचार कर रहे हैं. हालांकि उन्होंने इसकी विस्तृत रूपरेखा अभी सार्वजनिक नहीं की है. ट्रंप का मानना है कि वैश्विक बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ाना इस समय प्राथमिकता है. ताकि आम लोगों को महंगी ऊर्जा से राहत मिल सके. हालांकि इस पर अंतिम फैसला पूरी तरह से अमेरिकी राष्ट्रपति की शर्तों पर ही टिका होगा.

तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर तक पहुँच गई थीं. लेकिन जैसे ही ट्रंप ने यह दावा किया कि अमेरिका और इजरायल इस युद्ध में निर्णायक जीत की ओर बढ़ रहे हैं. बाजार में कीमतों में मामूली नरमी देखी गई. निवेशकों को उम्मीद है कि युद्ध जल्द समाप्त होगा और तेल की आपूर्ति सुचारू हो सकेगी. फिलहाल भारत को दी गई 30 दिनों की मोहलत एक बड़े रणनीतिक सुरक्षा कवच के रूप में देखी जा रही है.

भारत-अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी

भारत और अमेरिका के बीच हुए हालिया अंतरिम व्यापार समझौते के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल की खरीद कम कर दी थी. लेकिन वर्तमान युद्ध और खाड़ी देशों से आपूर्ति रुकने ने पूरे समीकरण ही बदल दिए हैं. अमेरिका जानता है कि भारत जैसे मित्र राष्ट्र की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बेहद जरूरी है. इसीलिए वॉशिंगटन ने अपने कड़े रुख में ढील देते हुए भारत को यह अस्थायी राहत दी है. जो दोनों देशों के मजबूत होते कूटनीतिक और आर्थिक रिश्तों को मजबूती प्रदान करता है.

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