बांग्लादेश ने भारत को दिया धोखा! यूनुस सरकार ने अमेरिका के साथ साजिश रच भारतीय कपास को दिखाया बाहर का रास्ता
बांग्लादेश और अमेरिका के बीच हुए द्विपक्षीय व्यापार समझौते के बाद भारत को एक झटका मिला है.बांग्लादेश अब अमेरिका से कपास खरीदने की योजना बना रहा है, जिससे भारत के निर्यात पर असर पड़ सकता है.

नई दिल्ली: बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में कपड़ा उद्योग सबसे बड़ा हिस्सा है. इस उद्योग को कच्चा माल जैसे कपास और धागा मुख्य रूप से भारत से मिलता है, लेकिन अब मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने अमेरिका के साथ एक नया व्यापार समझौता किया है, जिससे भारत के लिए चुनौती बढ़ गई है. इस डील से बांग्लादेश अमेरिका से कपास खरीदने की योजना बना रहा है, जिससे भारत के निर्यात पर असर पड़ सकता है.
अमेरिका के साथ नया व्यापार समझौता
9 फरवरी 2026 को बांग्लादेश और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता हुआ. इस डील के तहत अमेरिका ने बांग्लादेशी सामानों पर टैरिफ 19% कर दिया है. खास बात यह है कि अगर बांग्लादेश अपने कपड़े अमेरिकी कपास या मानव निर्मित फाइबर से बनाएगा, तो अमेरिकी बाजार में उस पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा यानी जीरो ड्यूटी. यह सुविधा बांग्लादेश के टेक्सटाइल सेक्टर के लिए बहुत फायदेमंद है.
यूनुस सरकार के सूचना सलाहकार शफीकुल आलम ने इसे 'गेम चेंजर' बताया. उन्होंने कहा कि इससे बांग्लादेश को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी. समझौता चुनाव से ठीक तीन दिन पहले हुआ, जिस पर सवाल भी उठे हैं क्योंकि इसका ड्राफ्ट सार्वजनिक नहीं किया गया.
भारत से कपास आयात कम करने की योजना
बांग्लादेश का टेक्सटाइल उद्योग बड़ा है, लेकिन वह खुद पर्याप्त कपास नहीं उगा पाता. 2024 में भारत ने बांग्लादेश को 1.6 अरब डॉलर का कपास धागा और 8.5 करोड़ डॉलर का मानव निर्मित फाइबर बेचा. लेकिन 2024 में शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद दोनों देशों के रिश्ते खराब हुए. भारत ने शेख हसीना को शरण दी, जिससे तनाव बढ़ा.
इसके बाद अप्रैल 2025 में बांग्लादेश ने भारतीय कपास के जमीनी आयात पर रोक लगाई. भारत ने भी जवाब में बांग्लादेशी रेडीमेड गारमेंट्स के जमीनी आयात पर रोक लगा दी. अब अमेरिका के साथ डील से बांग्लादेश भारत की जगह अमेरिका से कपास खरीदने की ओर बढ़ रहा है. इससे अमेरिकी कपास उत्पादकों को बड़ा बाजार मिलेगा.
क्या अमेरिकी कपास इतना फायदेमंद होगा?
ब्रैक यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री प्रोफेसर सलीम जहान ने कहा कि यह समझौता अमेरिकी कपास के लिए बांग्लादेश को आकर्षक बनाता है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिकी कपास की क्वालिटी भारत या मिस्र के कपास जितनी अच्छी होनी चाहिए.
अगर क्वालिटी कम हुई तो अमेरिकी खरीदार बांग्लादेशी कपड़े पसंद नहीं करेंगे. फ्रेट और ट्रांसपोर्टेशन खर्च जोड़ने पर यह सौदा कितना फायदेमंद होगा, यह भी देखना होगा. बांग्लादेश को अन्य देशों से कपास खरीदने की आजादी कम हो सकती है.


