राजपाल यादव को नहीं मिली राहत, जेल में ही रहेंगे 4 दिन, दिल्ली HC ने लगाई फटकार, अगली सुनवाई सोमवार को

दिल्ली हाई कोर्ट में गुरुवार को चेक बाउंस केस में बॉलीवुड के मशहूर कॉमेडियन राजपाल यादव की सुनवाई हुई. उनके वकील की गुहार पर कोर्ट ने अगली पेशी सोमवार तक के लिए टाल दी.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की जमानत याचिका पर सुनवाई सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी. चेक बाउंस मामले में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत ने अभिनेता को पहले फटकार लगाई और साफ कहा कि आप जेल इसलिए गए, क्योंकि आपने अपना वादा पूरा नहीं किया. कोर्ट ने शिकायतकर्ता को नोटिस जारी किया है और जमानत अर्जी पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. इस फैसले से राजपाल यादव को चार और रातें तिहाड़ जेल में गुजारनी पड़ेंगी.

यह मामला 2010 से जुड़ा है, जब राजपाल यादव ने अपनी फिल्म 'अता पता लापता' के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था. कर्ज न चुकाने और चेक बाउंस होने पर केस दर्ज हुआ. 5 फरवरी को कोर्ट की फटकार के बाद यादव ने तिहाड़ जेल में सरेंडर किया. उन्होंने जमानत के लिए परिवार में शादी का हवाला दिया, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया.

वकील का अनुरोध

दोपहर 2:30 बजे सुनवाई दोबारा शुरू होने पर राजपाल यादव के वकील ने अदालत से कहा, हमने उनसे कॉन्टैक्ट करने की कोशिश की, लेकिन संपर्क नहीं कर पाए. हमने बेल एप्लीकेशन फाइल की है. दूसरी तरफ से जवाब मांगा जा सकता है. केस सोमवार तक के लिए टाला जा सकता है. मैं तब तक कुछ न कुछ लेकर आऊंगा. कोर्ट ने इसे मान लिया और केस स्थगित कर दिया.

अदालत का शिकायतकर्ता को निर्देश 

अदालत ने शिकायतकर्ता से कहा कि आपको जमानत याचिका पर जवाब फाइल करना होगा. जब मैं फाइल देख रहा था, तो बहुत सी ऐसी बातें थीं जिनके बारे में हमें पता भी नहीं था. उन्होंने पहले ऑर्डर को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया है और सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें कोई राहत नहीं दी. वैसे भी, हम सोमवार को इस पर बात करेंगे.

जज की टिप्पणी

सुबह की सुनवाई में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि आपने परिवार में शादी के कारण बेल मांगी थी. वकील ने कहा कि आज ही पैसे जमा करेंगे. इस पर जज ने कहा- इससे पहले कम से कम दो दर्जन मौकों पर यादव ने बयान दिया कि वह अपना वादा पूरा करेंगे और पैसे देंगे, लेकिन हर बार वह ऐसा करने में नाकाम रहे.

अदालत का सख्त रुख

सुनवाई के दौरान अदालत ने नोट किया कि वकील और राजपाल यादव दोनों ने पैसे देने का बयान दिया था. जस्टिस शर्मा ने कहा, आप जेल इसलिए गए, क्योंकि आपने अपना वादा पूरा नहीं किया. आप पहले अपना मन बना लें और इस मामले पर आज दोपहर 2:30PM बजे फिर से सुनवाई होगी.'

मुसीबत की शुरुआत 2010 से

यह कहानी 2010 से शुरू हुई, जब राजपाल यादव ने निर्देशक के रूप में 'अता पता लापता' बनाने का फैसला लिया. फिल्म के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स से 5 करोड़ रुपये उधार लिए और 8 करोड़ लौटाने का वादा किया. फिल्म में 170 कलाकार थे, लेकिन यह बुरी तरह फ्लॉप हुई. कर्ज डूब गया, चेक बाउंस हुए और कंपनी ने केस कर दिया.

कड़कड़डूमा कोर्ट के नोटिस

कड़कड़डूमा कोर्ट ने कई नोटिस भेजे, लेकिन यादव लंबे समय तक पेश नहीं हुए. गलत हलफनामा देने पर 2013 में 10 दिनों की हिरासत हुई, जिसमें वे 3 से 6 दिसंबर तक चार दिन जेल में रहे. दिल्ली हाई कोर्ट ने बाद में सजा निलंबित की. निचली अदालत ने छह महीने की कैद सुनाई, जिसे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई. जून 2024 में सजा पर अस्थायी रोक लगी, क्योंकि यादव आदतन अपराधी नहीं हैं और समझौते की सलाह दी गई.

जनवरी में मिला अंतिम मौका

इस साल जनवरी 2026 में कोर्ट ने अंतिम मौका दिया. वकील ने कहा कि 50 लाख रुपये का इंतजाम हो गया है और एक हफ्ते का समय मांगा. जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने सरेंडर की मियाद बढ़ाने से इनकार किया. उन्होंने कहा कि चेक बाउंस में वादाखिलाफी गंभीर है. कई मौके दिए गए, लेकिन अदालत का भरोसा तोड़ा गया. कोर्ट ने 4 फरवरी शाम 4 बजे तक सरेंडर का आदेश दिया.

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