बांग्लादेश में सियासी खलबली! सेना से तनातनी के बीच यूनुस 8 दलों से करेंगे मुलाकात
Bangladesh political crisis: बांग्लादेश एक गहरे राजनीतिक संकट से गुजर रहा है, जहां मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस और सेना के बीच तनातनी लगातार बढ़ती जा रही है. इस तनाव के बीच यूनुस रविवार को आठ प्रमुख राजनीतिक दलों से मुलाकात करने जा रहे हैं, जिससे देश की सियासत में नया मोड़ आने की संभावना जताई जा रही है.

Bangladesh political crisis: बांग्लादेश इस समय एक गहरे राजनीतिक संकट से गुजर रहा है. देश में नेतृत्व को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है और अब यह संकट और भी गहराता दिखाई दे रहा है. मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस रविवार को आठ प्रमुख राजनीतिक दलों से मुलाकात करने जा रहे हैं. इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं, वहीं सेना और सरकार के बीच बढ़ती दूरी ने हालात को और भी पेचीदा बना दिया है.
सूत्रों के अनुसार, सेना ने यूनुस पर अविश्वास जताया है, जिसके बाद वह इस्तीफा देने की 'नौटंकी' कर रहे हैं ताकि वह अपनी राजनीतिक साख को बनाए रख सकें. इस राजनीतिक खींचतान में यूनुस को कुछ संगठनों और छात्र इकाइयों का समर्थन भी मिल रहा है.
यूनुस को 'जुलाई चेतना' का सहारा
सूत्रों के मुताबिक, जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) की छात्र इकाई यूनुस का समर्थन कर रही है. 'जुलाई चेतना' के बैनर तले दो रैलियां आयोजित की गई हैं, जिनका मकसद यूनुस के पक्ष में माहौल बनाना है. यह कदम यूनुस के राजनीतिक समर्थन को मजबूत करने के रूप में देखा जा रहा है.
सरकार और सेना के बीच संवादहीनता
बीते 48 घंटों में बांग्लादेश सरकार ने सेना से संपर्क साधने की कम से कम सात बार कोशिश की, लेकिन सेना की ओर से कोई जवाब नहीं मिला. यह संवादहीनता इस बात का संकेत है कि सेना और सरकार के बीच भरोसे की कमी लगातार बढ़ रही है, जो देश की राजनीतिक स्थिरता के लिए खतरनाक साबित हो सकती है.
सेना ने किया राजनीति में शामिल होने से इनकार
सेना की ओर से स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वे किसी भी राजनीतिक पार्टी के साथ संवाद या समझौते के इच्छुक नहीं हैं. यह बयान स्पष्ट करता है कि सेना फिलहाल खुद को पूरी तरह राजनीतिक घटनाक्रम से दूर रखना चाहती है, लेकिन उसकी मौजूदगी और बयान अब भी अहम भूमिका निभा रहे हैं.
बीएनपी ने दी चेतावनी
शनिवार को मिली जानकारी के अनुसार, सत्तारूढ़ बीएनपी (Bangladesh Nationalist Party) ने यूनुस से इस्तीफा वापस लेने की अपील की है. साथ ही, बीएनपी ने शाम 4:30 बजे ढाका समय पर एक अहम बैठक बुलाई है. सूत्रों ने बताया कि बीएनपी ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार खालिलुर रहमान के साथ-साथ सलाहकार आसिफ और महफूज को हटाने की मांग रखी है.
दिसंबर तक चुनाव नहीं तो यूनुस को समर्थन नहीं
बीएनपी ने सरकार को यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि दिसंबर तक चुनाव नहीं कराए जाते, तो पार्टी यूनुस के साथ कोई सहयोग नहीं करेगी. यह सख्त रुख यूनुस की राजनीतिक स्थिति को और भी अस्थिर बना सकता है, खासकर तब जब उनकी विश्वसनीयता पहले से ही सवालों के घेरे में है.
जमात और बीएनपी में भी बढ़ी खटास
यूनुस के समर्थन में खड़ी जमात-ए-इस्लामी और बीएनपी के बीच भी नीति सुधारों को लेकर मतभेद सामने आ रहे हैं. खासकर आगामी चुनावों की प्रक्रिया को लेकर दोनों दलों में तीखा टकराव देखने को मिल रहा है. यह टकराव विपक्ष की एकजुटता को कमजोर कर सकता है.
सेना प्रमुख का सख्त संदेश
बांग्लादेश की ताकतवर सेना ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है. सेना प्रमुख जनरल वॉकर-उज-ज़मान ने ढाका छावनी में कहा, "देश का भविष्य तय करने का अधिकार केवल एक निर्वाचित सरकार के पास है." उन्होंने यह भी दोहराया कि "राष्ट्रीय चुनाव दिसंबर तक कराए जाने चाहिए." सेना प्रमुख के इस बयान से संकेत मिलता है कि अब राजनीतिक दलों के पास बहुत कम समय बचा है.


