अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बड़ा बयान: ट्रंप आयतुल्लाह खामेनेई से मिलने को तैयार, मार्को रुबियो ने खोला राज
रूबियो के ताजा बयान ऐसे वक्त आए हैं जब अमेरिका मीडिल ईस्ट में अपनी सैन्य ताकत को तेजी से बढ़ा रहा है. उनका कहना है कि यह कदम ईरान के संभावित हमलों से अमेरिकी सैनिकों और ठिकानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया जा रहा है, ताकि कोई बड़ा खतरा टाला जा सके.

नई दिल्ली: ईरान के साथ बढ़ते तनाव और मध्य पूर्व में दूसरा अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात करने के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने महत्वपूर्ण बयान दिया है. उन्होंने कहा कि वाशिंगटन अभी भी तेहरान के साथ कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देता है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई से मिलने के लिए तैयार हैं, यदि ऐसा अवसर मिले.
मीडिया को दिए इंटरव्यू में रुबियो ने जोर दिया कि ट्रंप प्रत्यक्ष संवाद को वैश्विक विवादों के हल का व्यावहारिक तरीका मानते हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि विरोधियों से मुलाकात को किसी तरह की रियायत नहीं माना जाना चाहिए. यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है, लेकिन कूटनीति के रास्ते को बंद नहीं कर रहा.
ट्रंप किसी से भी मिलने को तैयार
आई सर्व अंडर अ प्रेसिडेंट दैट्स विलिंग टू मीट विद एनिबडी,” रुबियो ने कहा. “आई’म प्रिटी कॉन्फिडेंट इन सेइंग दैट इफ द आयतुल्लाह सेड टुमारो ही वांटेड टू मीट विद प्रेसिडेंट ट्रंप, द प्रेसिडेंट वुड मीट हिम — नॉट बिकॉज ही एग्रीज विद द आयतुल्लाह बट बिकॉज ही थिंक्स दैट्स द वे यू सॉल्व प्रॉब्लम्स इन द वर्ल्ड, एंड ही डजंट व्यू मीटिंग समवन एज अ कंसेशन.
सैन्य तैनाती का मकसद निरोधक
रुबियो के बयानों के बीच अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य उपस्थिति मजबूत की है. उन्होंने कहा कि यह कदम अमेरिकी बलों और सुविधाओं पर संभावित ईरानी हमलों को रोकने के लिए उठाया गया है. उन्होंने ईरान के अतीत में अमेरिकी हितों को निशाना बनाने की प्रवृत्ति का जिक्र किया और दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित नहीं करने दिया जाएगा, क्योंकि यह वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है.
समझौते की प्राथमिकता
सैन्य शक्ति के प्रदर्शन के बावजूद रुबियो ने कहा कि ट्रंप ईरान के साथ बातचीत के जरिए समझौता करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. उन्होंने बताया कि चर्चाएं जल्द शुरू हो सकती हैं, जिसमें अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर भाग लेंगे.“द प्रेसिडेंट वुड ऑलवेज प्रेफर टू एंड प्रॉब्लम्स विद अ डील,” रुबियो ने कहा.
चीन के साथ सहयोगियों के रिश्तों पर स्पष्टीकरण
रुबियो ने कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की हालिया बीजिंग यात्राओं और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की आगामी यात्रा के बाद उठे सवालों का भी जवाब दिया. उन्होंने कहा कि बड़े देशों के बीच राजनयिक संबंध सामान्य और जरूरी हैं. इट वुड बी इरिस्पॉन्सिबल फॉर ग्रेट पावर्स नॉट टू हैव रिलेशनशिप्स एंड टॉक थ्रू थिंग्स एंड, टू द एक्सटेंट पॉसिबल, अवॉइड अननेसेसरी कॉन्फ्लिक्ट,” रुबियो ने कहा. उन्होंने बताया कि ट्रंप बीजिंग जाने की योजना बना रहे हैं और पहले भी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिल चुके हैं. रुबियो ने खुद भी चीन के विदेश मंत्री से मुलाकात की बात कही.


