केन्या के पूर्व पीएम रैला ओडिंगा के अंतिम दर्शन में फिर भगदड़, दर्जनों घायल
केन्या के पूर्व पीएम रैला ओडिंगा के अंतिम दर्शन के दौरान भारी भीड़ के कारण भगदड़ मची, जिसमें कई लोग घायल हुए. पिछले दिनों उनके राजकीय अंतिम संस्कार और पार्थिव शरीर के दर्शन के दौरान भी इसी तरह की घटनाएं हुई थीं, जिससे सुरक्षा चुनौतीपूर्ण साबित हुई.

शनिवार को केन्या के पूर्व प्रधानमंत्री रैला ओडिंगा के अंतिम दर्शन के लिए आयोजित एक सभा में भारी भीड़ के चलते एक बार फिर भगदड़ मच गई, जिससे कई लोग घायल हो गए. घायल लोगों में कुछ को गंभीर स्थिति में अस्पताल ले जाना पड़ा.
राजकीय अंत्येष्टि के बाद हुई घटना
यह घटना ओडिंगा की राजकीय अंत्येष्टि के बाद हुई. शुक्रवार को नैरोबी में उनके अंतिम संस्कार के दौरान भी भगदड़ मची थी, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी और 160 से अधिक लोग घायल हुए थे. इस घटना के ठीक एक दिन पहले, जब उनका शव भारत से नैरोबी पहुंचा था, तो एक स्टेडियम में जनता को उनके पार्थिव शरीर दर्शन के लिए रखा गया था. उस समय भी भारी भीड़ के कारण भगदड़ मची थी.
उस भगदड़ को काबू में करने के लिए पुलिस ने हवाई फायरिंग की और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था. इस दौरान चार लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे.
ओडिंगा, दशकों तक केन्याई राजनीति में एक प्रमुख और प्रभावशाली नेता रहे. बुधवार को भारत में 80 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया था. वह भारत में इलाज करा रहे थे. उनके निधन से केन्या में शोक की लहर दौड़ गई और उनके अंतिम संस्कार और दर्शन के कार्यक्रम में भारी संख्या में लोग शामिल होने के लिए एकत्र हुए.
ओडिंगा के प्रति लोगों का सम्मान
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ओडिंगा के प्रति लोगों का अत्यधिक सम्मान और उन्हें देखने की इच्छा ही इस तरह की भगदड़ का कारण बनी. उनके निधन के बाद केन्याई जनता ने उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए हर संभव प्रयास किया, जिससे आयोजनों के दौरान सुरक्षा और नियंत्रण बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया.
इस घटना ने यह भी उजागर किया कि बड़े पैमाने पर सार्वजनिक कार्यक्रमों में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है. ओडिंगा के जीवन और उनके योगदान को सम्मानित करने के लिए आयोजित ये कार्यक्रम उनके चाहने वालों और देशवासियों के लिए भावुक और यादगार अवसर बने, बावजूद इसके कि उन्हें अंतिम दर्शन के दौरान इस तरह के हादसे का सामना करना पड़ा.
ओडिंगा की राजनीतिक विरासत और उनके नेतृत्व के कारण उन्हें जनता की गहरी श्रद्धा प्राप्त थी, जो उनके निधन के बाद भी प्रकट हुई. हालांकि, लगातार दो दिनों तक भगदड़ की घटनाओं ने उनके अंतिम दर्शन और राजकीय अंत्येष्टि के आयोजनों को तनावपूर्ण बना दिया.


