जन्म से अंधे लोगों की आंखों को रोशनी देगा एलन मस्क का ‘ब्लाइंडसाइट’? 2026 में होगा पहला मानव परीक्षण

एलन मस्क की न्यूरोटेक कंपनी न्यूरालिंक का ब्रेन इम्प्लांट ‘ब्लाइंडसाइट’ दृष्टिबाधित लोगों को देखने की क्षमता देने का दावा करता है. 2026 में इसके पहले मानव परीक्षण की तैयारी है, हालांकि इससे जुड़े जोखिम और नैतिक सवाल भी बरकरार हैं.

एलन मस्क की न्यूरोटेक कंपनी 'न्यूरालिंक' जन्म से अंधे लोगों की आंखों की रोशनी वापस लाने की दिशा में काम कर रही है. कंपनी का ब्रेन इम्प्लांट ‘ब्लाइंडसाइट’ दृष्टिबाधित लोगों को देखने की क्षमता देने का दावा करता है. साल 2026 में इसके पहले मानव परीक्षण की तैयारी चल रही है, जिसने दुनिया भर के वैज्ञानिकों और आम लोगों का ध्यान खींचा है.

ब्लाइंडसाइट एक ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) आधारित डिवाइस है. इसे खास तौर पर उन लोगों के लिए बनाया जा रहा है, जिनकी आंखें या ऑप्टिक नर्व काम नहीं कर रही हैं. सितंबर 2024 में अमेरिकी एफडीए ने इसे “ब्रेकथ्रू डिवाइस” का दर्जा दिया था, यानी यह गंभीर बीमारी के इलाज में बड़ी उम्मीद मानी जा रही है.

एलन मस्क के अनुसार, यह डिवाइस सीधे दिमाग के उस हिस्से में लगाया जाएगा जो देखने से जुड़ा होता है, यानी विजुअल कॉर्टेक्स. इससे आंखों और ऑप्टिक नर्व को पूरी तरह बायपास किया जा सकेगा.

कैसे काम करेगा यह ब्रेन इम्प्लांट?

ब्लाइंडसाइट के सिस्टम में एक कैमरा होगा, जो आसपास की तस्वीरें कैप्चर करेगा. यह जानकारी वायरलेस तरीके से एक कंप्यूटर या प्रोसेसर तक जाएगी, जहां इसे विद्युत संकेतों में बदला जाएगा. इसके बाद ये संकेत दिमाग में लगे इम्प्लांट तक पहुंचेंगे। वहां मौजूद बेहद पतले इलेक्ट्रोड दिमाग को उसी तरह उत्तेजित करेंगे, जैसे सामान्य स्थिति में आंखों से आने वाले संकेत करते हैं.

दिमाग इन संकेतों को तस्वीरों में बदलने की कोशिश करेगा. शुरुआत में दिखने वाली तस्वीरें बहुत साफ नहीं होंगी. मस्क ने खुद कहा है कि शुरुआती अनुभव पुराने वीडियो गेम जैसे होंगे, लेकिन भविष्य में यह तकनीक काफी बेहतर हो सकती है.

क्या जन्म से अंधे लोग भी देख पाएंगे?

मस्क का दावा है कि अगर किसी व्यक्ति का विजुअल कॉर्टेक्स सुरक्षित है, तो वह जन्म से अंधा होने के बावजूद देखने का अनुभव कर सकता है. हालांकि न्यूरोसाइंस के विशेषज्ञ मानते हैं कि जन्मजात अंधे लोगों में दिमाग का यह हिस्सा पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता. इसलिए उनके लिए स्पष्ट और उपयोगी दृष्टि हासिल करना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा.

हालांकि, ब्लाइंडसाइट जैसे ब्रेन इम्प्लांट के साथ कई खतरे जुड़े हैं. सर्जरी के दौरान संक्रमण, न्यूरॉन्स को नुकसान, या इम्प्लांट का खराब होना गंभीर समस्या बन सकता है. इसके अलावा, दिमाग से जुड़े डेटा की सुरक्षा, निजता और इस तकनीक तक सबकी समान पहुंच जैसे नैतिक सवाल भी उठते हैं.

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