दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को हुआ उम्रकैद की सजा, देश में मार्शल लॉ लागू करने और साजिश रचने का आरोप
दक्षिण कोरिया की एक अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को उम्रकैद की सजा सुनाई है. उन्हें र्शल लॉ लागू करने, सत्ता का दुरुपयोग करने और विद्रोह की साजिश रचने का दोषी ठहराया गया है.

नई दिल्ली: दक्षिण कोरिया की एक अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को उम्रकैद की सजा सुनाई है. अदालत ने उन्हें 2024 में मार्शल लॉ लागू करने, सत्ता का दुरुपयोग करने और विद्रोह की साजिश रचने का दोषी ठहराया. यह सजा देश में लोकतंत्र पर गंभीर हमले के रूप में देखी जा रही है. यून पर मृत्युदंड तक की मांग की गई थी, लेकिन अदालत ने आजीवन कारावास का फैसला सुनाया.
संसद पर कब्जे का प्रयास
65 वर्षीय यून सुक येओल ने दिसंबर 2024 में सेना और पुलिस को सक्रिय करके संसद पर नियंत्रण करने की कोशिश की. आरोप है कि उन्होंने उदारवादी बहुमत वाली नेशनल असेंबली को गैरकानूनी तरीके से कब्जे में लेने की योजना बनाई. यून ने अपना बचाव करते हुए कहा था कि यह कदम "राष्ट्र विरोधी ताकतों" को रोकने के लिए जरूरी था, जो उनके काम में रुकावट डाल रही थी.
मार्शल लॉ सिर्फ छह घंटे तक लागू रहा. भारी हथियारों से लैस सैनिकों और पुलिस ने संसद भवन की घेराबंदी कर दी थी, लेकिन सांसदों ने बाधाओं को तोड़कर अंदर पहुंचकर सर्वसम्मति से मार्शल लॉ हटाने का प्रस्ताव पास किया. इसके बाद आपात आदेश वापस लेना पड़ा. इस घटना ने पूरे देश में बड़ा राजनीतिक संकट पैदा कर दिया था.
अभियोजकों की मांग
जनवरी में अभियोजकों ने यून के लिए फांसी की सजा की मांग की थी. उनका कहना था कि असंवैधानिक मार्शल लॉ ने संसद और चुनाव आयोग के काम को बाधित किया और लोकतांत्रिक व्यवस्था को खत्म करने की कोशिश की. हालांकि दक्षिण कोरिया में 1997 के बाद से किसी को फांसी नहीं दी गई है. इसे व्यवहार में मृत्युदंड पर रोक माना जाता है. इसलिए अदालत ने उम्रकैद का फैसला सुनाया.
साथियों पर भी सख्त कार्रवाई
अदालत ने मार्शल लॉ में शामिल कई पूर्व अधिकारियों को भी सजा दी. पूर्व रक्षा मंत्री किम योंग ह्यून को योजना में मुख्य भूमिका निभाने और सेना को सक्रिय करने के लिए 30 साल की जेल की सजा हुई. यून को पिछले महीने अलग मामले में भी पांच साल की सजा मिल चुकी थी. इसमें गिरफ्तारी का विरोध करना, दस्तावेजों में हेरफेर और बिना पूरी कैबिनेट बैठक के आपात आदेश जारी करना शामिल था.
सियोल सेंट्रल कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री हान डक सू समेत दो अन्य कैबिनेट सदस्यों को भी दोषी ठहराया. हान डक सू को 23 साल की सजा दी गई. उन पर कैबिनेट बैठक के जरिए आदेश को वैध दिखाने, रिकॉर्ड में बदलाव और झूठी गवाही देने का आरोप था. हान ने फैसले के खिलाफ अपील की है.


