बांग्लादेश में फिर हिंदुओं पर हमला! मुस्लिम युवक की हत्या के बाद घरों-दुकानों को बनाया निशाना

यह सबसे हैरान करने वाली बात थी कि मृतक रकीब की मां नूरजहां बेगम ने खुद मीडिया के सामने बयान दिया कि इस हत्या में हिंदू समुदाय का कोई भी हाथ नहीं है. उन्होंने साफ कहा, हमारा हिंदुओं के साथ कोई विवाद नहीं है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

बांग्लादेश के उत्तर-पश्चिमी जिले रंगपुर और पश्चिमी जिले कुश्तिया में शनिवार को भारी हिंसा और तनाव की खबरें सामने आईं. एक मुस्लिम आध्यात्मिक गुरु की हत्या के बाद भड़की भीड़ ने रंगपुर में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के घरों और दुकानों को निशाना बनाया. हैरानी की बात यह है कि मृतक के परिजनों द्वारा हिंदुओं का हाथ होने से इनकार किए जाने के बावजूद भीड़ ने इस समुदाय पर हमला बोल दिया. पुलिस इसे मुख्य मामले से ध्यान भटकाने की एक सोची-समझी साजिश करार दे रही है.

ढाका से लगभग 300 किलोमीटर दूर रंगपुर के दासपारा बाजार इलाके में शनिवार को एक मुस्लिम आध्यात्मिक गुरु रकीब हसन की बेरहमी से हत्या कर दी गई. शुरुआती जांच के अनुसार, हसन की हत्या कथित तौर पर एक ड्रग तस्कर मोहम्मद मोमिन ने पुरानी रंजिश के चलते की थी.

हालांकि, हत्या के कुछ ही घंटों बाद इलाके में सांप्रदायिक तनाव फैल गया. एक उग्र भीड़ ने दासपारा बाजार में स्थित हिंदुओं के घरों और दुकानों पर हमला बोल दिया. स्थानीय समाचार पत्र 'प्रथम आलो' के अनुसार, इस क्षेत्र में हिंदू समुदाय के लगभग सौ से अधिक परिवार रहते हैं. चश्मदीदों का कहना है कि हमलावरों ने तोड़फोड़ के साथ-साथ लूटपाट की भी कोशिश की.

ध्यान भटकाने के लिए हुए हमले

रंगपुर के पुलिस कमिश्नर मोहम्मद मजीद अली ने मीडिया को बताया कि पुलिस असली हत्यारों की तलाश कर रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदू समुदाय के खिलाफ हुई हिंसा एक तीसरे पक्ष की साजिश है ताकि पुलिस का ध्यान रकीब हसन की हत्या के मामले से भटकाया जा सके. उन्होंने कहा, हमने उन लोगों की पहचान कर ली है जिन्होंने हिंदू घरों और दुकानों में तोड़फोड़ की है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मृतक रकीब की मां नूरजहां बेगम ने स्वयं बयान दिया कि इस हत्या में हिंदू समुदाय का कोई हाथ नहीं है. उन्होंने पत्रकारों से कहा, हमारा हिंदुओं साथ कोई विवाद नहीं है. हम सिर्फ अपने बेटे के असली हत्यारों की गिरफ्तारी चाहते हैं.

इस्लाम के अपमान का आरोप

रंगपुर की घटना के समांतर ही ढाका से 200 किलोमीटर पश्चिम में स्थित कुश्तिया जिले में भी हिंसा की एक बड़ी वारदात हुई. यहां एक स्कूल शिक्षक और आध्यात्मिक हस्ती शमीम रजा जहांगीर की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई. उन पर इस्लाम के अपमान का आरोप लगाया गया था. दौलतपुर थाना पुलिस के मुताबिक, हमलावरों ने न केवल जहांगीर की जान ली, बल्कि उनके कम से कम सात अनुयायियों को भी गंभीर रूप से घायल कर दिया. उग्र भीड़ ने जहांगीर के आश्रम को भी आग के हवाले कर दिया. पुलिस ने बताया कि जहांगीर को इससे पहले 2021 में भी कट्टरपंथी संगठनों की शिकायतों पर विवादास्पद गतिविधियों के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में कोर्ट के आदेश पर उन्हें रिहा कर दिया गया था.

स्थिति संभालने की कोशिश

इन दोहरे हमलों के बाद प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए रंगपुर और कुश्तिया में भारी पुलिस बल और रैपिड एक्शन बटालियन की तैनाती की है. फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है. बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा के आंकड़े डराने वाले हैं. 'बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद' द्वारा हाल ही में जारी रिपोर्ट के अनुसार, इस साल 1 जनवरी से 31 मार्च के बीच देश में सांप्रदायिक हिंसा की 133 घटनाएं दर्ज की गई हैं. मानवाधिकार संगठनों ने सरकार से अपील की है कि वे कट्टरपंथी तत्वों पर नकेल कसें और अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करें.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो