बांग्लादेश में भीड़ ने एक और हिंदू युवक को बनाया निशाना, लगाई आग; गंभीर रूप से घायल हुआ शख्स

बांग्लादेश में चुनावों की सुगबुगाहट के बीच हिंदू अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है. पड़ोसी देश में हाल के दिनों में हिंदुओं के साथ बर्बरता के कई मामले सामने आए हैं. बांग्लादेश में गुरुवार को एक और हिंदू को निशाना बनाया गया है.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्लीः बांग्लादेश में हाल के दिनों में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर हो रहे हमलों ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है. एक के बाद एक सामने आ रही हिंसक घटनाओं से यह संकेत मिल रहा है कि सामाजिक असहिष्णुता और भीड़ हिंसा की समस्या गहराती जा रही है. ताजा मामला शरियतपुर जिले से सामने आया है, जहां एक हिंदू व्यक्ति को हिंसक भीड़ ने निशाना बनाया.

शरियतपुर जिले में खोकन दास पर हमला

31 दिसंबर को बांग्लादेश के शरियतपुर जिले में 50 वर्षीय खोकन दास पर एक हिंसक समूह ने हमला कर दिया. बताया गया कि खोकन दास अपने घर लौट रहे थे, तभी अचानक एक भीड़ ने उन्हें घेर लिया. हमलावरों ने उन पर धारदार हथियारों से हमला किया और उनकी पिटाई की. इसके बाद उन्हें आग के हवाले कर दिया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए. घायल अवस्था में उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया.

लगातार हो रही घटनाओं से डर का माहौल

खोकन दास पर हमला हाल के दिनों में किसी हिंदू पर हुआ चौथा बड़ा हमला बताया जा रहा है. इन घटनाओं ने अल्पसंख्यक समुदाय के बीच भय और असुरक्षा की भावना को और गहरा कर दिया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएँ अब अलग-अलग इलाकों में सामने आ रही हैं, जिससे स्थिति और चिंताजनक बनती जा रही है.

24 दिसंबर को अमृत मंडल की हत्या

इससे पहले 24 दिसंबर को कालीमोहर यूनियन के हुसैनडांगा इलाके में एक और हिंसक घटना सामने आई थी. वहाँ एक भीड़ ने कथित तौर पर 29 वर्षीय हिंदू युवक अमृत मंडल की पीट-पीटकर हत्या कर दी. इस घटना ने पूरे इलाके में तनाव का माहौल पैदा कर दिया था और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठे थे.

दीपू चंद्र दास की हत्या ने झकझोरा

18 दिसंबर को मयमनसिंह के भालुका उपज़िला में एक और दिल दहला देने वाली घटना हुई थी. एक कारखाने में काम करने वाले 25 वर्षीय हिंदू युवक दीपू चंद्र दास पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया, जिसे बाद में झूठा बताया गया. आरोप लगने के बाद एक भीड़ ने दीपू चंद्र दास पर हमला कर दिया, जिससे उनकी मौत हो गई. इस घटना ने पूरे देश में आक्रोश और चिंता को जन्म दिया.

प्रशासन की जिम्मेदारी

इन लगातार हो रहे हमलों के बाद बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं. मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई ज़रूरी है. साथ ही, समाज में आपसी सौहार्द और विश्वास बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है.

आगे की चुनौती

बांग्लादेश जैसे बहुधार्मिक देश में शांति और सुरक्षा बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है. हाल की घटनाएं यह दिखाती हैं कि भीड़ हिंसा और अफवाहों पर नियंत्रण बेहद ज़रूरी है. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकार और प्रशासन इन घटनाओं से सबक लेकर अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाते हैं.

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