ट्रंप को लगा दाल की मिर्ची! अमेरिकी सीनेटरों ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र, भारत से दाल पर 30% टैरिफ हटवाने की अपील
अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक बातचीत को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास पत्र गया है. उनसे पत्र में अपील की गई है कि वे पीएम मोदी से बात करें.

अमेरिका और भारत के बीच लंबे समय से चल रही व्यापारिक बातचीत एक बार फिर मुश्किलों में फंसती दिख रही है. इस बार वजह है दाल यानी पल्स क्रॉप्स. हाल ही में दो अमेरिकी सीनेटरों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पत्र लिखा है. उन्होंने भारत से अमेरिकी दालों पर लगे 30 फीसदी आयात शुल्क को हटाने की मांग की है. यह शुल्क पिछले साल अक्टूबर में लगाया गया था, जो नवंबर से लागू हो गया.
अमेरिकी सीनेटरों की शिकायत
ये पत्र रिपब्लिकन सीनेटर स्टीव डेन्स मोंटाना से और डकोटा से केविन क्रेमर नॉर्थ ने लिखा है. दोनों राज्य अमेरिका में दालों के बड़े उत्पादक हैं, खासकर मटर, लेंटिल्स और चने जैसी फसलों के. सीनेटरों का कहना है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दाल उपभोक्ता है, जो वैश्विक खपत का करीब 27 फीसदी लेता है.
भारतीय लोग लेंटिल्स, चिकपीज, सूखी दालें और मटर बहुत खाते हैं. लेकिन अमेरिकी निर्यात पर भारत ने भारी शुल्क लगा रखा है. इससे अमेरिकी किसानों को बड़ा नुकसान हो रहा है. उन्होंने इसे अनुचित बताया और कहा कि इससे उनके उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद भारतीय बाजार में मुश्किल से बिक पा रहे हैं.
भारत का जवाबी कदम
बता दें, यह टैरिफ अचानक नहीं लगा. भारत ने यह फैसला अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने के जवाब में लिया है. अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क भी लगाया था. ऐसे में भारत ने पीली मटर (येलो पीज) पर 30 फीसदी ड्यूटी लगाई, जिसमें बेसिक कस्टम ड्यूटी और एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर सेस शामिल है. इससे पहले कुछ दालों पर ड्यूटी में छूट थी, लेकिन अब स्थिति बदल गई है.
ट्रंप से पीएम मोदी से बात करने की अपील
पत्र में सीनेटरों ने ट्रंप से सलाह दी है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मुद्दे पर बात करें. उनका मानना है कि दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ना चाहिए, ताकि अमेरिकी किसानों को फायदा हो और भारतीय उपभोक्ताओं को सस्ती, अच्छी क्वालिटी की दाल मिल सके. उन्होंने ट्रंप का शुक्रिया भी अदा किया कि वे अपने राज्यों के किसानों के हितों की रक्षा कर रहे हैं. पहले भी 2020 में ऐसे ही पत्र के बाद ट्रंप ने मोदी को यह मुद्दा उठाया था.
क्या डील पटरी से उतरेगी?
दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता लंबे समय से अटका हुआ है. टैरिफ की इस जंग से बातचीत और जटिल हो सकती है. अमेरिका भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि भारत अपने किसानों और अर्थव्यवस्था के हितों की रक्षा कर रहा है. दाल जैसी रोजमर्रा की चीज अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति का हिस्सा बन गई है. देखना होगा कि इस 'मिर्ची' वाली स्थिति का क्या हल निकलता है.


