ईरान ने अमेरिका को फिर दी धमकी! ‘असंभव मिलिट्री ऑपरेशन’ या फिर ‘बुरा समझौता’

गार्ड्स ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास सिर्फ दो विकल्प हैं। या तो वह ईरान के खिलाफ "असंभव मिलिट्री ऑपरेशन" करें, या फिर "बुरा समझौता" स्वीकार करें।

Sachin Hari Legha

नई दिल्ली: ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने रविवार (03 मई 2026) को अमेरिका को खुली चेतावनी दी है। गार्ड्स ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास सिर्फ दो विकल्प हैं। या तो वह ईरान के खिलाफ "असंभव मिलिट्री ऑपरेशन" करें, या फिर "बुरा समझौता" स्वीकार करें। यह बयान सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित ऑनलाइन पोस्ट के जरिए दिया गया। गार्ड्स खुफिया संगठन ने कहा कि अमेरिका के पास फैसले के लिए अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है।

शांति वार्ता हुई नाकाम! 

आपको बताते चलें कि अमेरिका और इजरायल ने फरवरी के अंत में मध्य पूर्व में सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। यह युद्ध 8 अप्रैल से रुका हुआ है। पाकिस्तान में शांति वार्ता का एक दौर हो चुका है, लेकिन वह नाकाम रहा। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकाबंदी लगा रखी है। जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग बंद कर दिया है। इसी तनाव के चलते दूसरे दौर की बातचीत भी नहीं हो पाई।

चीन-रूस-यूरोप के बदले रुख का प्रभाव 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गार्ड्स ने अपने बयान में कहा कि चीन, रूस और यूरोप के रुख में बदलाव आया है। इसी वजह से अमेरिका के पास फैसला लेने का समय "कम हो गया है"। बयान में ईरान की तरफ से नौसैनिक नाकाबंदी को लेकर दी गई "समय सीमा" का भी जिक्र किया गया, हालांकि इसका ब्योरा नहीं दिया गया।

ईरान ने अमेरिका को दी एक महीने की डेडलाइन 

दरअसल अमेरिकी समाचार एजेंसी एक्सियोस के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका को एक महीने की समय सीमा दी है। दो सूत्रों के हवाले से बताया गया कि तेहरान चाहता है कि 30 दिन में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर से खोला जाए।

वहीं अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म हो और ईरान-लेबनान में युद्ध स्थायी रूप से बंद हो। ट्रंप ने रविवार को ट्रुथ सोशल पर कहा कि वह ईरान के नए प्रस्ताव की समीक्षा करेंगे। लेकिन साथ ही जोड़ा, "मुझे नहीं लगता कि यह प्रस्ताव स्वीकार्य होगा"।

ईरान की चार बड़ी शर्तें   

गौरतलब है कि ईरानी मीडिया तसनीम और फार्स के अनुसार, ईरान ने साफ कर दिया है कि दोनों पक्षों के बीच सभी लंबित मुद्दे 30 दिन में हल होने चाहिए। तेहरान का जोर "युद्धविराम बढ़ाने के बजाय युद्ध खत्म करने" पर है।

ईरान की मुख्य मांगें हैं: पहला, अमेरिकी सैन्य बलों की ईरान की सीमा से वापसी। दूसरा, नौसैनिक नाकाबंदी हटाना। तीसरा, ईरान की जब्त संपत्तियां मुक्त करना और प्रतिबंध हटाना। चौथा, लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के लिए नया तंत्र बनाना।

अब सबकी नजरें वॉशिंगटन पर हैं कि ट्रंप प्रशासन ईरान की इस डेडलाइन और शर्तों पर क्या रुख अपनाता है।

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