तीन देशों की सिफारिश पर बची दो नेताओं की जान, हिट लिस्ट से हटे लेकिन सिर्फ पांच दिन की मिली राहत
ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव के बीच बड़ा कूटनीतिक मोड़ आया है। दो बड़े ईरानी नेताओं को हिट लिस्ट से अस्थायी राहत मिली है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची और संसद स्पीकर मोहम्मद गालिबाफ को फिलहाल हिट लिस्ट से हटा दिया गया है। यह फैसला अमेरिका और इजरायल ने लिया है। लेकिन यह राहत स्थायी नहीं है। सिर्फ 4 से 5 दिन के लिए उन्हें निशाने से बाहर रखा गया है। यानी खतरा अभी भी सिर पर मंडरा रहा है। इस फैसले के पीछे तीन इस्लामिक देशों की बड़ी भूमिका बताई जा रही है।
पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र ने मिलकर अमेरिका और इजरायल से अपील की थी। इन देशों का कहना था कि अगर इन नेताओं को मार दिया गया तो बातचीत का रास्ता बंद हो जाएगा। कूटनीति खत्म हो जाएगी और जंग और भड़क जाएगी। यही दलील इस फैसले की वजह बनी।
क्या यह सिर्फ वक्त खरीदने की कोशिश है?
असल में यह फैसला एक तरह से समय खरीदने की रणनीति माना जा रहा है। अमेरिका और इजरायल चाहते हैं कि इन 5 दिनों में कोई समझौता हो जाए। अगर बातचीत सफल रही तो हालात बदल सकते हैं। लेकिन अगर डील नहीं हुई तो ये दोनों नेता फिर से टारगेट लिस्ट में आ सकते हैं। यानी यह राहत अस्थायी और शर्तों पर टिकी हुई है।
पाकिस्तान ने क्या दावा किया?
पाकिस्तान ने इस मामले में बड़ा दावा किया है। उसका कहना है कि उसी की पहल पर अमेरिका और इजरायल राजी हुए। पाकिस्तानी सूत्रों के मुताबिक उन्होंने अमेरिका से साफ कहा था कि अगर इन नेताओं को खत्म कर दिया गया तो बातचीत का कोई मतलब नहीं रहेगा। इसके बाद अमेरिका ने इजरायल से बात की और यह फैसला लिया गया।
वार्ता की कोशिशें कितनी तेज हैं?
अब तुर्की, पाकिस्तान और मिस्र मिलकर ईरान को बातचीत के लिए राजी करने की कोशिश कर रहे हैं। खबर है कि पाकिस्तान ने अपने देश में बातचीत कराने का प्रस्ताव भी दिया है। लेकिन अभी तक ईरान की तरफ से कोई ठोस जवाब नहीं आया है। समय तेजी से निकल रहा है और दबाव बढ़ता जा रहा है।
ट्रंप और ईरान के बीच क्या टकराव है?
डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि ईरान बातचीत के लिए मजबूर हो रहा है। वहीं ईरान ने इस दावे को खारिज कर दिया है। उसने अपनी तरफ से शर्तें रख दी हैं। ईरान का कहना है कि अमेरिका का प्रस्ताव एकतरफा है और उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं।
आगे क्या हो सकता है सबसे बड़ा सवाल?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन पांच दिनों में क्या कोई समझौता हो पाएगा। अगर बातचीत सफल नहीं हुई तो हालात और खतरनाक हो सकते हैं। दो बड़े नेताओं की जान फिर से खतरे में पड़ जाएगी। दुनिया की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर है। आने वाले दिन तय करेंगे कि जंग रुकेगी या और भड़केगी।


