18 दिन में बिखर गया ईरान का पावर स्ट्रक्चर! एक-एक कर खो दिए खामेनेई समेत कई टॉप लीडर

अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान के कई शीर्ष नेता और सैन्य अधिकारी मारे गए, जिससे उसे बड़ा झटका लगा. इसके बावजूद ईरान ने जवाबी हमले तेज किए और जंग के लंबा खिंचने के संकेत मिल रहे हैं.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में चल रहा संघर्ष अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां हर दिन नई खबरें हालात को और गंभीर बना रही हैं. अमेरिका और इजरायल के हमलों ने ईरान को गहरा झटका दिया है. इस जंग में सिर्फ सैन्य नुकसान ही नहीं, बल्कि देश के कई बड़े और प्रभावशाली नेताओं की मौत ने ईरान को अंदर तक हिला दिया है.

इस संघर्ष की शुरुआत में ही ईरान को एक ऐसा नुकसान हुआ, जिसकी भरपाई आसान नहीं है. 28 फरवरी को हुए हमलों में देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई. उनके साथ ही उनके करीबी सलाहकार अली शामखानी भी मारे गए, जो लंबे समय से सुरक्षा और परमाणु नीति जैसे अहम मामलों में भूमिका निभा रहे थे. यह घटना ईरान के लिए एक बड़ा सदमा थी, क्योंकि दोनों ही नेता देश की रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे.

सेना के शीर्ष अधिकारियों की भी मौत

इन हमलों में ईरान के कई बड़े सैन्य अधिकारी भी मारे गए. इस्लामिक रिवॉलूशनरी गार्ड कॉर्प्स के कमांडर मोहम्मद पाकपुर, डिफेंस मिनिस्टर अजीज नासिरजादे और सेना के चीफ ऑफ स्टाफ अब्दुलरहीम मोसावी की मौत ने ईरान की सैन्य ताकत को बड़ा झटका दिया. एक साथ इतने वरिष्ठ अधिकारियों का जाना किसी भी देश के लिए गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है.

जवाबी कार्रवाई में पीछे नहीं रहा ईरान

भारी नुकसान के बावजूद ईरान ने पीछे हटने की बजाय जवाबी हमले तेज कर दिए. उसने इजरायल के साथ-साथ मिडिल ईस्ट के अन्य हिस्सों को भी निशाना बनाया. हालात इतने बिगड़ गए कि दुबई जैसे शहर, जो अपनी ऊंची इमारतों और व्यापारिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है, वहां भी मिसाइल हमलों की खबरें सामने आईं. इससे साफ है कि यह संघर्ष अब सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यापक रूप ले चुका है.

लगातार मिल रहे नए झटके

17 मार्च को एक बार फिर ईरान को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा. इस दिन देश के प्रमुख सुरक्षा अधिकारी अली लारिजानी की हत्या कर दी गई. उनके साथ उनके बेटे की भी जान चली गई. इसी दिन घोलामरेजा सुलेमानी की भी मौत हुई. इसके अलावा, खुफिया विभाग के मंत्री इस्माइल खातिब की हत्या ने हालात को और गंभीर बना दिया. खातिब को सत्ता के बेहद करीबी लोगों में गिना जाता था, इसलिए उनकी मौत ने सरकार को और कमजोर कर दिया.

लंबा खिंच सकता है संघर्ष

इस जंग को अब 18 दिन से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन इसके खत्म होने के कोई संकेत नजर नहीं आ रहे. माना जा रहा है कि ईरान अब इस संघर्ष को लंबा खींचने की रणनीति पर काम कर रहा है. उसका उद्देश्य यह हो सकता है कि वह अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को लंबे समय तक उलझाकर उन पर दबाव बनाए.

दुनिया पर बढ़ता असर

यह संघर्ष सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे मिडिल ईस्ट और दुनिया पर पड़ रहा है. लगातार बढ़ती हिंसा और हमले वैश्विक शांति के लिए चिंता का विषय बनते जा रहे हैं. आने वाले दिनों में यह स्थिति और गंभीर हो सकती है, अगर जल्द कोई समाधान नहीं निकाला गया.

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