कई मोर्चों पर फंसा इजराइल, सेना टूटने की कगार पर, आईडीएफ चीफ की चेतावनी से मचा हड़कंप

इजराइल की सेना पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। खुद सेना प्रमुख ने चेतावनी दी है कि हालात ऐसे ही रहे तो सेना भीतर से ही टूट सकती है।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

इजराइल डिफेंस फोर्स के प्रमुख एयाल ज़मीर ने साफ शब्दों में कहा है कि सेना अपने ही बोझ तले टूट सकती है। उन्होंने सुरक्षा कैबिनेट की बैठक में यह चेतावनी दी। उनका कहना था कि सैनिकों की भारी कमी हो गई है। हालात इतने गंभीर हैं कि सेना अपने नियमित मिशन भी पूरा नहीं कर पाएगी। यह बयान इजराइल की सैन्य ताकत पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

क्यों बढ़ रही है सैनिकों की कमी ?

इजराइल इस समय एक साथ कई मोर्चों पर जंग लड़ रहा है। ईरान पर लगातार हमले हो रहे हैं। लेबनान में हिज़्बुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई जारी है। वेस्ट बैंक में भी तनाव बढ़ा हुआ है। हर जगह सेना तैनात है। ऐसे में सैनिकों पर दबाव बहुत बढ़ गया है। रिजर्व फोर्स भी थक चुकी है। यही वजह है कि अब सेना में कमी साफ दिखाई देने लगी है।

आईडीएफ चीफ ने क्या मांग रखी?

एयाल ज़मीर ने सरकार के सामने तीन बड़ी मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि तुरंत भर्ती कानून लाया जाए। रिजर्व ड्यूटी के नियम मजबूत किए जाएं। अनिवार्य सेवा की अवधि बढ़ाई जाए। उन्होंने साफ कहा कि अगर अभी कदम नहीं उठाए गए तो हालात और बिगड़ेंगे। यह सीधी चेतावनी है कि सेना अब ज्यादा दबाव झेलने की स्थिति में नहीं है।

जंग के मैदान से क्या तस्वीर आ रही है?

जमीन पर हालात और भी गंभीर हैं। हाल ही में हिज़्बुल्लाह के हमले में एक इजराइली सैनिक मारा गया और चार घायल हुए। पिछले कुछ हफ्तों में कई सैनिक मारे जा चुके हैं। दूसरी तरफ लेबनान में भारी तबाही हुई है। वहां हजारों लोग मारे गए हैं और लाखों लोग बेघर हो चुके हैं। यह जंग अब इंसानी संकट में बदलती जा रही है।

विपक्ष ने सरकार पर क्या आरोप लगाए?

इजराइल के विपक्षी नेता यायर लैपिड ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू बिना तैयारी के सेना को कई मोर्चों पर झोंक रहे हैं। न पर्याप्त संसाधन हैं और न ही सही रणनीति। लैपिड का कहना है कि यह सीधी लापरवाही है। अब सरकार जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।

क्या रणनीति पूरी तरह फेल हो रही है?

मौजूदा हालात देखकर ऐसा लग रहा है कि इजराइल की रणनीति बिखर रही है। हर दिन नया मोर्चा खुल रहा है। लेकिन संसाधन सीमित हैं। सेना पर दबाव बढ़ता जा रहा है। अंदर से भी चेतावनी मिल रही है। यह साफ संकेत है कि हालात नियंत्रण से बाहर जा सकते हैं। यह सिर्फ सैन्य संकट नहीं, बल्कि रणनीतिक विफलता भी है।

आगे क्या होगा सबसे बड़ा सवाल?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इजराइल इस संकट से कैसे निकलेगा। क्या सरकार नए फैसले लेगी या हालात और बिगड़ेंगे। सेना की हालत अगर ऐसी ही रही तो बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। दुनिया की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर है। आने वाले दिन इजराइल के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।

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