यूपी के स्‍कूलों में 1 अप्रैल से नया न‍ियम लागू, छात्रों के मोबाइल लाने पर रहेगी रोक

नए सत्र से स्कूलों में प्रार्थना सभा में रोज अखबार पढ़ना अनिवार्य होगा, जिससे छात्रों की भाषा और सामान्य ज्ञान मजबूत होगा. साथ ही, मोबाइल पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा, जबकि डिजिटल शिक्षा को संतुलित तरीके से बढ़ावा दिया जाएगा.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

लखनऊ से मिली जानकारी के अनुसार, आगामी शैक्षणिक सत्र से माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई के तरीके में अहम बदलाव किए जा रहे हैं. अप्रैल से शुरू होने वाले नए सत्र में सुबह की प्रार्थना सभा को अधिक उपयोगी बनाते हुए उसमें समाचार पढ़ने को अनिवार्य किया गया है. अब छात्र-छात्राएं प्रतिदिन अखबारों की प्रमुख सुर्खियां पढ़ेंगे. साथ ही उनमें आए कठिन शब्दों का अर्थ समझेंगे और उनका सही प्रयोग भी सीखेंगे. इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत विकसित करना और उनकी भाषा क्षमता को मजबूत बनाना है.

शिक्षकों की भूमिका तय 

इस व्यवस्था को लागू करने के लिए शिक्षकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण तय की गई है. उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे छात्रों को समाचारों का सही उच्चारण सिखाएं और जटिल शब्दों के अर्थ के साथ उनके वाक्य प्रयोग को भी समझाएं. इससे विद्यार्थियों का सामान्य ज्ञान बढ़ेगा और भाषा पर उनकी पकड़ मजबूत होगी. यह निर्णय पहले जारी किए गए आदेशों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए लिया गया है, जिसमें स्कूलों में समाचार पढ़ने को जरूरी बताया गया था.

इसके साथ ही, विद्यालयों में मोबाइल फोन के उपयोग पर पूरी तरह से रोक लगाने का भी निर्णय लिया गया है. परिषद का मानना है कि कम उम्र में मोबाइल का अत्यधिक इस्तेमाल बच्चों के मानसिक, शारीरिक और नैतिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डालता है. खासकर आंखों की समस्या, पढ़ाई में ध्यान की कमी और ऑनलाइन गेम्स की लत जैसी परेशानियों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है. छात्रों को स्कूल परिसर में मोबाइल लाने की अनुमति नहीं होगी, ताकि वे पढ़ाई पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकें.

डिजिटल शिक्षा को नहीं किया गया नजरअंदाज 

हालांकि, डिजिटल शिक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया गया है. छात्रों को तकनीक के सही उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा. सभी पंजीकृत विद्यार्थियों के ईमेल आईडी बनवाए जाएंगे और उन्हें इसके उपयोग की जानकारी दी जाएगी. साथ ही स्मार्ट क्लास, सूचना प्रौद्योगिकी और ऑनलाइन शैक्षणिक प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दिया जाएगा.

विद्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि वे छात्रों को खान एकेडमी, द टीचर एप, मनोदर्पण पोर्टल और करियर एडवाइजर एप जैसे शैक्षणिक प्लेटफॉर्म्स के बारे में जानकारी दें और उनका उपयोग करने के लिए प्रेरित करें. इस नई पहल के जरिए पारंपरिक शिक्षा और डिजिटल लर्निंग के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है, ताकि विद्यार्थी किताबों और तकनीक दोनों का सही लाभ उठा सकें.

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