'शादीशुदा पुरुष का बालिग महिला के साथ लिव-इन में रहना जुर्म नहीं' इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश
लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त आदेश दिया है. कोर्ट की नजरों में एक शादीशुदा पुरुष का बालिग महिला के साथ लिव-इन में रहना जुर्म नहीं है.

नई दिल्ली: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर एक अहम और स्पष्ट फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि कोई शादीशुदा पुरुष किसी बालिग महिला के साथ उसकी सहमति से लिव-इन में रह रहा है, तो इसे अपराध नहीं माना जा सकता. कोर्ट ने यह भी साफ किया कि नैतिकता और कानून अलग-अलग विषय हैं और केवल सामाजिक सोच के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती.
गिरफ्तारी पर रोक, सुरक्षा के दिए निर्देश
यह फैसला जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की डिवीजन बेंच ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया. कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिकाकर्ता जोड़े की गिरफ्तारी पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी. साथ ही पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि दोनों को किसी भी परिस्थिति में गिरफ्तार न किया जाए.
इसके अलावा कोर्ट ने महिला के परिवार वालों को भी सख्त चेतावनी दी है कि वे जोड़े को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचाए और न ही किसी माध्यम से संपर्क करने की कोशिश करें.
SP को सौंपी गई जिम्मेदारी
कोर्ट ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर शाहजहांपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया. अदालत ने कहा कि बालिग जोड़े की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस की जिम्मेदारी है. कोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही ऑनर किलिंग जैसे मामलों में स्पष्ट दिशा-निर्देश दे चुका है.
क्या है पूरा मामला?
यह मामला शाहजहांपुर जिले के जैतीपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है. यहां महिला की मां ने जनवरी 2026 में FIR दर्ज कर आरोप लगाया था कि एक व्यक्ति उसकी बेटी को बहला-फुसलाकर ले गया है. पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया था. हालांकि, कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि महिला बालिग है और अपनी मर्जी से उस व्यक्ति के साथ रह रही है. याचिकाकर्ताओं ने संयुक्त हलफनामा दाखिल कर यह भी बताया कि वे बिना किसी दबाव के साथ रह रहे हैं.
कोर्ट ने क्या कहा?
विपक्ष की ओर से दलील दी गई कि पुरुष पहले से शादीशुदा है, इसलिए उसका किसी अन्य महिला के साथ रहना गलत है, लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि यदि दोनों पक्ष बालिग हैं और अपनी सहमति से साथ रह रहे हैं, तो यह कानून के तहत अपराध नहीं है.
ऑनर किलिंग की आशंका पर सख्ती
महिला ने पहले ही पुलिस को लिखित में बताया था कि उसके परिवार वाले इस रिश्ते के खिलाफ हैं और उसे जान से मारने की धमकी दे रहे हैं. कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई कि पुलिस ने समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की.अदालत ने मामले में अगली सुनवाई की तारीख 8 अप्रैल तय की है और विपक्षी पक्ष को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है.


