अब चांद पर खाना बनाएंगे अंतरिक्ष यात्री? चने की फसल उगाने में हुई बड़ी सफलता

वैज्ञानिकों ने एक बहुत उपलब्धि हासिल की है. उन्होंने चांद पर चना उगानें की कोशिश की, ताकि भविष्य में चंद्रमा पर लंबे समय तक रहने वाले अंतरिक्ष यात्री अपना भोजन खुद उगा सकें

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: भविष्य में चंद्रमा पर लंबे समय तक रहने वाले अंतरिक्ष यात्री अपना भोजन खुद उगा सकें, यह वैज्ञानिकों की बड़ी जिज्ञासा है. चांद पर संसाधनों का इस्तेमाल करके आत्मनिर्भर होना जरूरी है, क्योंकि पृथ्वी से हर चीज भेजना महंगा और मुश्किल होता है. इसी सोच के साथ टेक्सस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक अनोखा प्रयोग किया और सफलता हासिल की. उन्होंने चंद्रमा जैसी नकली मिट्टी में चना उगाकर दिखाया कि स्पेस फार्मिंग संभव है.

माइल्स किस्म का चना क्यों चुना?

शोधकर्ताओं ने काबुली चने की 'माइल्स' किस्म चुनी. यह किस्म छोटे आकार की और तनाव सहन करने में मजबूत है, जो अंतरिक्ष के सीमित वातावरण के लिए उपयुक्त है. इस सफल प्रयोग से उम्मीद जगी है कि भविष्य में चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्री ताजा चना उगा सकेंगे. इससे उन्हें पौष्टिक भोजन मिलेगा और लंबी मिशनों में निर्भरता कम होगी.

चांद की मिट्टी की समस्या

चंद्रमा की सतह पर लूनर रेगोलिथ यानी धूल जैसी मिट्टी होती है. इसमें जरूरी खनिज तो हैं, लेकिन बैक्टीरिया और कार्बनिक पदार्थ बिल्कुल नहीं होते. साथ ही कुछ भारी धातुएं पौधों के विकास को रोकती हैं. पृथ्वी की मिट्टी से यह बहुत अलग है. प्रोजेक्ट की प्रमुख वैज्ञानिक सारा ओलिवेरा सैंटोस ने बताया कि उद्देश्य यही समझना था कि इस रेगोलिथ को पौधों के लिए उपयोगी मिट्टी में कैसे बदला जाए.

मिट्टी को बेहतर बनाने का तरीका

वैज्ञानिकों ने अपोलो मिशन के सैंपल जैसी नकली मिट्टी तैयार की. इसमें रेड विगलर केंचुओं से बनी वर्मीकम्पोस्ट खाद मिलाई गई, जो पोषक तत्वों और अच्छे बैक्टीरिया से भरपूर होती है. चने के बीजों पर अरबस्कुलर माइकोराइजल फंगस लगाया गया.

यह फंगस जड़ों को पोषक तत्व सोखने में मदद करता है और भारी धातुओं के नुकसान को भी कम करता है. अलग-अलग मिश्रणों में चने उगाकर उनके विकास का अध्ययन किया गया.

फंगस की भूमिका और नतीजे

परिणामों से पता चला कि 75 प्रतिशत तक चंद्र धूल वाले मिश्रण में भी चने उग सकते हैं और बीज पैदा कर सकते हैं, लेकिन धूल की मात्रा ज्यादा होने पर पौधे कमजोर पड़ने लगे. जिन पौधों पर फंगस लगाया गया था, वे बिना फंगस वाले पौधों से ज्यादा समय तक स्वस्थ रहे. फंगस खुद इस नकली मिट्टी में अच्छी तरह टिक गया, जिससे एक बार लगाने पर बार-बार इस्तेमाल की जरूरत नहीं पड़ेगी.

अगला कदम यह जांचना है कि चांद पर उगाए चने खाने लायक सुरक्षित हैं या नहीं और उनमें पोषण कितना है. यह प्रयोग स्पेस फार्मिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो चंद्रमा पर बस्ती बसाने के सपने को करीब ला सकता है.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो