ईरान के सामने ट्रंप की रणनीति ढही, शांति योजना फेल, दूतों की भूमिका पर उठे बड़े सवाल

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच ट्रंप की शांति योजना कमजोर पड़ती दिख रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि रणनीति में खामियां हैं और हालात अमेरिका के लिए मुश्किल होते जा रहे हैं।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

ईरान के सामने डोनाल्ड ट्रंप की शांति योजना कमजोर पड़ती दिख रही है। हालात ऐसे बन गए हैं कि अमेरिका दबाव में नजर आ रहा है। एक्सपर्ट मानते हैं कि यह योजना जमीनी हकीकत से दूर थी। ईरान ने इसे मानने से साफ इनकार कर दिया। इससे अमेरिका की रणनीति पर सवाल खड़े हो गए हैं। जंग की दिशा अब बदलती दिख रही है।

दूतों की भूमिका पर सवाल क्यों?

ट्रंप के करीबी जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। इन दोनों को बातचीत की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन ईरान के साथ बातचीत में कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। एक्सपर्ट का कहना है कि अनुभव की कमी साफ नजर आई। इस वजह से पूरी रणनीति कमजोर पड़ गई।

शांति प्रस्ताव में क्या बड़ी मांगें थीं?

शांति प्रस्ताव में ईरान से कई बड़ी मांगें की गई थीं। उसमें परमाणु कार्यक्रम खत्म करने की बात थी। बैलिस्टिक मिसाइलों को छोड़ने की शर्त रखी गई थी। साथ ही क्षेत्रीय गठबंधनों को भी खत्म करने को कहा गया। विशेषज्ञों के मुताबिक यह मांगें बहुत सख्त थीं। ईरान के लिए इन्हें मानना आसान नहीं था। इसलिए प्रस्ताव शुरुआत से ही कमजोर माना गया।

एक्सपर्ट्स क्या चेतावनी दे रहे हैं?

स्वीडन की लुंड यूनिवर्सिटी की विशेषज्ञ रूज़बेह पारसी ने कहा कि यह योजना अवास्तविक थी। उन्होंने बताया कि यह शर्तें आत्मसमर्पण जैसी थीं। ईरान इसे कभी स्वीकार नहीं करेगा। पूर्व अमेरिकी अधिकारी जैक सुलिवन ने भी कहा कि बातचीत को सही तरह समझा ही नहीं गया। इससे हालात और बिगड़ गए।

ईरान की रणनीति क्या है?

ईरान अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रहा है। उसे साफ पता है कि उसे क्या चाहिए। उसकी रणनीति है कि वह हर दबाव का जवाब दे। वह जंग के मैदान में डटा रहना चाहता है। मिसाइल हमले भी इसी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं। ईरान किसी भी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा है।

अमेरिका क्यों उलझा हुआ दिख रहा?

इसके उलट अमेरिका की रणनीति बदलती नजर आ रही है। ट्रंप अलग-अलग मंचों पर अलग बातें करते दिखे हैं। कभी वे सत्ता परिवर्तन की बात करते हैं। कभी शांति की बात करते हैं। इससे संदेश साफ नहीं जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इससे भ्रम की स्थिति बनी है। यही अमेरिका की कमजोरी बन रही है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह शांति योजना आगे नहीं बढ़ पाएगी। हालात और गंभीर हो सकते हैं। अगर रणनीति नहीं बदली गई तो जंग लंबी चल सकती है। ईरान और अमेरिका के बीच टकराव बढ़ने की आशंका है। दुनिया की नजर अब इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में बड़ा फैसला देखने को मिल सकता है।

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