इजरायल अलर्ट पर, ईरान की ‘ट्रिगर पर उंगली’... ट्रंप के संकेतों के बाद पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य तैनाती, इजरायल का अलर्ट और ईरान की चेतावनियां बड़े टकराव की आशंका बढ़ा रही हैं.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की ओर बढ़ता दिख रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच तनाव खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है और इसके संकेत जमीन से लेकर आसमान तक साफ नजर आने लगे हैं. अमेरिकी सेना का बड़े पैमाने पर जमावड़ा, इजरायल का एयर डिफेंस अलर्ट पर जाना और ईरान की तीखी चेतावनियां- ये सभी मिलकर क्षेत्र को एक अस्थिर मोड़ पर ले आए हैं. हालात ऐसे समय में बिगड़े हैं जब ईरान के भीतर देशव्यापी प्रदर्शनों, मौतों के आंकड़ों और परमाणु कार्यक्रम को लेकर सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं.

गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ नाम की एक नई पहल शुरू की. इसे संघर्ष प्रभावित इलाकों में स्थिरता और शांति बढ़ाने वाली अंतरराष्ट्रीय कोशिश बताया गया. लेकिन हैरानी की बात यह रही कि इसके महज 24 घंटे के भीतर ही ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत दे दिए. इससे पहले भी वह ईरान में प्रदर्शनकारियों की मौतों को लेकर कई बार सख्त चेतावनी दे चुके हैं.

ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी दबाव के चलते ईरान को बड़ी संख्या में प्रस्तावित फांसी रोकनी पड़ी. हालांकि बाद में उनके बयान का लहजा कुछ नरम हुआ. जानकारों का कहना है कि ट्रंप अक्सर दबाव और नरमी, दोनों रणनीतियों को साथ लेकर चलते हैं ताकि सामने वाला झुकने को मजबूर हो.

अमेरिकी नौसेना और वायुसेना की हलचल

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार USS Abraham Lincoln की अगुवाई वाला एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप जल्द ही अरब सागर या फारस की खाड़ी में तैनात हो सकता है. इसे ईरान पर दबाव बढ़ाने की एक बड़ी सैन्य तैयारी माना जा रहा है. रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि इस समूह में एक हमला करने वाली पनडुब्बी भी शामिल है.

इसके अलावा F-15E Strike Eagle लड़ाकू विमान पहले से ही पश्चिम एशिया में मौजूद हैं. हवा में ईंधन भरने वाले टैंकर विमानों को भी आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे अमेरिकी लड़ाकू विमानों की मारक क्षमता और दायरा बढ़ सके. साथ ही, अमेरिका ने क्षेत्र में THAAD और Patriot जैसे उन्नत एंटी-मिसाइल सिस्टम की संख्या भी बढ़ानी शुरू कर दी है. इसका मकसद इजरायल, कतर और अन्य सहयोगी देशों को संभावित मिसाइल या ड्रोन हमलों से बचाना बताया जा रहा है.

ईरान के अंदर हालात और मौतों के आंकड़े

यह सैन्य तैयारी ऐसे समय में हो रही है जब ईरान के भीतर आर्थिक हालात और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन तेज हैं. सरकारी मीडिया के अनुसार हजारों लोगों की मौत हुई है, जबकि मानवाधिकार संगठनों का दावा इससे कहीं ज्यादा संख्या का है. इन मौतों को लेकर अमेरिका लगातार ईरान पर दबाव बना रहा है.

ईरान ने भी अमेरिका को साफ संदेश दिया है कि उसकी “उंगली ट्रिगर पर” है. ईरानी नेतृत्व ने अमेरिका और इजरायल पर आरोप लगाया कि वे देश के भीतर अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं. ईरान इसे हाल के सैन्य टकरावों का बदला लेने की साजिश बता रहा है.

परमाणु मुद्दा: तनाव की जड़

तनाव की एक बड़ी वजह ईरान का परमाणु कार्यक्रम भी है. जून 2025 में हुए हमलों के बाद ईरान के संवर्धित यूरेनियम के भंडार को लेकर स्थिति साफ नहीं है. अमेरिका ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने परमाणु गतिविधियां दोबारा शुरू कीं, तो जवाबी कार्रवाई होगी.

आगे क्या हो सकता है

सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका हमला करता है तो वह पहले सीमित कार्रवाई कर सकता है, ताकि दबाव बनाया जाए और बातचीत का रास्ता खुला रहे. वहीं ईरान भी सीधे युद्ध के बजाय नियंत्रित या अप्रत्यक्ष जवाबी कदम उठा सकता है, जैसे प्रॉक्सी समूहों के जरिए दबाव बनाना या होर्मुज जलडमरूमध्य में जोखिम बढ़ाना.

साथ ही, अगर हालात बिगड़ते हैं तो इजरायल भी इस संघर्ष का अहम हिस्सा बन सकता है. उसका मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम किसी भी हमले को रोकने में अहम माना जा रहा है, लेकिन गाज़ा संघर्ष के चलते उसके लिए एक और मोर्चा खोलना जोखिम भरा हो सकता है.

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