जानें कौन हैं भारतीय मूल के वकील 'नील कात्याल', जिसने अमेरिकी SC में बढ़ाई ट्रंप की मुश्किलें

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ लगाने के राष्ट्रपति अधिकार को खारिज करते हुए फैसला कांग्रेस के पक्ष में दिया. इस मामले में भारतीय मूल के वकील नील कात्याल ने असंवैधानिकता का तर्क रखते हुए अहम भूमिका निभाई.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ आदेश को रद्द कर दिया. अदालत ने साफ कहा कि आयात शुल्क लगाने का अधिकार राष्ट्रपति के पास नहीं, बल्कि कांग्रेस के पास है. इस फैसले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा. दिलचस्प बात यह है कि इस कानूनी लड़ाई में एक भारतीय मूल के वकील की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही. 

अमेरिका की सर्वोच्च अदालत ने अपने फैसले में कहा कि संविधान के अनुसार टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार कांग्रेस को दिया गया है. राष्ट्रपति इस अधिकार का इस्तेमाल आपातकालीन कानूनों के नाम पर नहीं कर सकते. यह मामला तब उठा जब ट्रंप प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम के तहत टैरिफ लागू किए थे. अदालत ने माना कि इस कानून का उपयोग अपने दायरे से बाहर जाकर किया गया.

नील कात्याल की अहम भूमिका

इस मामले में भारतीय मूल के वरिष्ठ वकील नील कात्याल ने प्रमुख भूमिका निभाई. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में जोरदार दलीलें पेश करते हुए कहा कि टैरिफ लगाने का कदम असंवैधानिक है. फैसले के बाद कात्याल ने कहा कि अदालत ने यह साबित कर दिया है कि अमेरिका में कानून सर्वोपरि है. उनके अनुसार, राष्ट्रपति शक्तिशाली हो सकते हैं, लेकिन वे संविधान से ऊपर नहीं हैं. उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला किसी एक व्यक्ति के बारे में नहीं, बल्कि राष्ट्रपति पद की सीमाओं को स्पष्ट करने से जुड़ा है.

कैसे शुरू हुआ मामला?

यह केस छोटे व्यापारियों ने ‘लिबर्टी जस्टिस’ नामक संगठन के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट में दायर किया था. उनका तर्क था कि टैरिफ से उनके कारोबार पर बुरा असर पड़ा है. दूसरी ओर, ट्रंप ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है. उनका कहना था कि अन्य देश अमेरिका का फायदा उठा रहे हैं और इससे अमेरिकी नागरिकों को नुकसान हो रहा है.

कौन हैं नील कात्याल?

नील कात्याल का जन्म शिकागो में भारतीय माता-पिता के घर हुआ. उनके माता-पिता पेशे से डॉक्टर और इंजीनियर थे, लेकिन कात्याल ने कानून के क्षेत्र को चुना. उन्होंने येल लॉ स्कूल से पढ़ाई की और बाद में जस्टिस स्टीफन ब्रेयर के साथ काम किया. साल 2010 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबमा ने उन्हें कार्यकारी सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया. 

उन्होंने सरकार की ओर से कई अहम मामलों में सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की है. कात्याल संविधान और जटिल अपीलीय मामलों के विशेषज्ञ माने जाते हैं. उन्होंने वोटिंग राइट्स एक्ट 1965 और ट्रैवल बैन जैसे मामलों में भी अहम भूमिका निभाई. उन्हें अमेरिका के न्याय विभाग से सम्मान मिल चुका है और फोर्ब्स ने उन्हें शीर्ष वकीलों की सूची में शामिल किया है.

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