India-US व्यापार समझौते पर नया विवाद! व्हाइट हाउस की नई फैक्ट शीट से मचा हड़कंप, ट्रेड डील में हुआ बदलाव?

व्हाइट हाउस ने इंडिया-US ट्रेड डील की फैक्ट शीट में बदलाव करते हुए दाल का जिक्र हटाया और 500 अरब डॉलर की खरीद को ‘प्रतिबद्धता’ से ‘इरादा’ बताया. इस पर कांग्रेस ने सवाल उठाए, जबकि सरकार ने किसानों के हित सुरक्षित होने की बात कही.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. व्हाइट हाउस ने अपनी फैक्ट शीट में कुछ अहम बदलाव किए हैं, जिसके बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं. खास बात यह है कि दस्तावेज से दाल का जिक्र हटा दिया गया है और 500 अरब डॉलर की खरीद को लेकर इस्तेमाल की गई भाषा भी बदली गई है. पहले जहां इसे 'प्रतिबद्धता' बताया गया था, अब उसे 'इरादा' कहा गया है.

मंगलवार को जारी फैक्ट शीट में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की मुख्य शर्तों का जिक्र किया गया था. इसमें कहा गया था कि भारत कई अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर शुल्क कम करेगा या खत्म करेगा. इनमें ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स, रेड सोरघम, ट्री नट्स, कुछ दालें, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स जैसे उत्पाद शामिल बताए गए थे.

साथ ही यह भी उल्लेख था कि भारत ऊर्जा, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, कृषि और अन्य क्षेत्रों में 500 अरब डॉलर से अधिक के अमेरिकी उत्पाद खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है. हालांकि अब 'कमिटमेंट' शब्द को बदलकर 'इंटेंड' कर दिया गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि यह एक पक्का वादा नहीं बल्कि इरादा है.

कांग्रेस का आरोप

फैक्ट शीट सामने आने के बाद कांग्रेस ने सरकार को घेरा. पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि 9 फरवरी को जारी नई फैक्ट शीट में दाल का जिक्र जोड़ा गया, जबकि 6 फरवरी को जारी संयुक्त बयान में इसका उल्लेख नहीं था. कांग्रेस का कहना है कि 500 अरब डॉलर की खरीद में कृषि उत्पाद भी शामिल हैं और यह जानकारी देश से छिपाई गई. विपक्ष ने सवाल उठाया कि अगर कृषि उत्पाद समझौते का हिस्सा हैं, तो किसानों को इसकी पूरी जानकारी क्यों नहीं दी गई.

सरकार की सफाई

विवाद बढ़ने पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि इस समझौते में किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है. उनके अनुसार, कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की पूरी सुरक्षा की गई है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी कहा कि कोई भी ऐसा उत्पाद समझौते में शामिल नहीं किया गया है, जिससे भारतीय किसानों को नुकसान हो. उन्होंने बताया कि सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, चीनी, मोटे अनाज, पोल्ट्री, डेयरी, केला, खट्टे फल, हरी मटर, छोले, मूंग और तिलहन जैसे उत्पादों पर भारत ने कोई टैरिफ रियायत नहीं दी है.

दोनों देशों के बीच जल्द होगी बातचीत

फैक्ट शीट में यह भी कहा गया है कि दोनों देश आने वाले हफ्तों में इस ढांचे को लागू करने की दिशा में काम करेंगे और एक अंतरिम समझौते के जरिए व्यापक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देंगे. गैर-शुल्क बाधाओं को कम करने और उत्पत्ति नियमों पर भी बातचीत होगी, ताकि दोनों देशों को समान लाभ मिल सके.

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