कर्ज के दलदल में फंसा पाकिस्तान, उधार के सहारे चल रही है पूरी मुल्क की अर्थव्यवस्था

पाकिस्तान आज अपनी कमाई से ज्यादा उधार पर जी रहा है। विदेशी कर्ज, बढ़ता ब्याज और कमजोर अर्थव्यवस्था ने देश को गंभीर संकट के मुहाने पर खड़ा कर दिया है।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से कमजोर चल रही है। देश की कमाई सीमित है। खर्च लगातार बढ़ रहा है। टैक्स वसूली ठीक से नहीं हो पा रही। उद्योग ठप पड़े हैं। निर्यात घट चुका है। डॉलर की भारी कमी बनी रहती है। सरकार को हर साल पुराने कर्ज चुकाने के लिए नया कर्ज लेना पड़ता है। यही वजह है कि पाकिस्तान आज कर्ज के जाल में फंसा हुआ है।

अमेरिका से कितना कर्ज लिया गया?

पाकिस्तान पर अमेरिका का बड़ा कर्ज बकाया है। यह पैसा सीधे और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के जरिए मिला। इस कर्ज का इस्तेमाल विकास और आर्थिक सहायता में हुआ। लेकिन समय पर भुगतान नहीं हो सका। ब्याज बढ़ता गया। आर्थिक दबाव बढ़ता चला गया। हालात ऐसे बने कि डिफॉल्ट का डर मंडराने लगा। अमेरिका से लिया गया कर्ज पाकिस्तान की परेशानी की बड़ी वजह बन चुका है।

चीन की मदद या नई मुसीबत?

चीन ने पाकिस्तान को इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भारी कर्ज दिया। सड़कें बनीं। बिजली परियोजनाएं शुरू हुईं। बंदरगाह विकसित हुए। उम्मीद थी कि इससे कमाई बढ़ेगी। लेकिन मुनाफा उम्मीद से कम रहा। ब्याज की रकम ज्यादा निकली। भुगतान मुश्किल होता गया। अब चीन का कर्ज पाकिस्तान की गर्दन पर भारी बोझ बन गया है।

खाड़ी देशों का सहारा कितना टिकाऊ?

सऊदी अरब और खाड़ी देशों ने पाकिस्तान को तेल और नकद सहायता दी। इससे कुछ समय राहत मिली। विदेशी मुद्रा भंडार संभला। लेकिन यह मदद स्थायी नहीं रही। हर सहायता के साथ शर्तें जुड़ती गईं। पाकिस्तान की निर्भरता बढ़ती चली गई। अपनी आर्थिक ताकत बनाने पर ध्यान नहीं दिया गया। नतीजा यह हुआ कि संकट जस का तस बना रहा।

IMF की शर्तों ने क्या बदला?

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पाकिस्तान को कर्ज दिया। बदले में कड़े नियम लगाए गए। सब्सिडी घटाने को कहा गया। टैक्स बढ़ाए गए। बिजली और गैस महंगी हुई। आम आदमी पर बोझ बढ़ा। सरकार को सख्त फैसले लेने पड़े। जनता में नाराजगी फैली। IMF का कर्ज राहत कम और दबाव ज्यादा बनता चला गया।

आम लोगों पर क्या असर पड़ा?

कर्ज का सीधा असर जनता पर पड़ा। महंगाई तेज हो गई। खाने-पीने की चीजें महंगी हो गईं। रोजगार के मौके घटे। सरकारी योजनाएं रुकीं। गरीब परिवारों की हालत और खराब हुई। मध्यम वर्ग दबाव में आ गया। कर्ज चुकाने की कीमत आम लोग चुका रहे हैं।

क्या संकट से निकलने की राह है?

पाकिस्तान के सामने रास्ता आसान नहीं है। खर्च पर नियंत्रण जरूरी है। टैक्स सिस्टम सुधारना होगा। उद्योगों को मजबूत करना होगा। निर्यात बढ़ाना होगा। उधार पर निर्भरता घटानी होगी। अगर ऐसा नहीं हुआ तो संकट और गहराएगा। आर्थिक स्थिरता केवल ठोस सुधारों से ही संभव है।

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