'जहां दर्द होगा, वहीं मारेंगे...', खामेनेई पर ट्रंप का तीखा हमला, ईरान प्रदर्शन में अब तक 217 लोगों की मौत

ईरान में आसमान छूती महंगाई और लगातार गिरती रियाल के खिलाफ गुस्साए लोग सड़कों पर उतर आए हैं. ये विरोध अब हिंसक झड़पों में बदल गया है. अब तक कम से कम 62 लोग मारे जा चुके हैं और 2300 से ज्यादा गिरफ्तार हो चुके हैं.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

नई दिल्ली: ईरान में भड़के जनआंदोलन ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति को भी झकझोर दिया है. महंगाई, गिरती मुद्रा और गहराती आर्थिक बदहाली के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोगों पर कार्रवाई की खबरों के बीच दुनिया भर में चिंता बढ़ रही है. अलग-अलग मानवाधिकार संगठनों और मीडिया रिपोर्ट्स में मौतों और गिरफ्तारियों के आंकड़े सामने आ रहे हैं, जिससे हालात और गंभीर होते दिख रहे हैं.

प्रदर्शनों की आग के बीच तेहरान और वॉशिंगटन के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. एक ओर ईरान ने सख्ती के संकेत दिए हैं, तो दूसरी ओर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की खुली चेतावनियों ने तनाव को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है. इंटरनेट बंदी, गोलीबारी और ‘आतंकी’ जैसे आरोपों के बीच देशभर में उबाल बना हुआ है.

मौतें और गिरफ्तारियां

अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक अब तक कम से कम 62 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है. वहीं टाइम मैग्जीन की रिपोर्ट कहती है कि प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई जा रही है. एक डॉक्टर के हवाले से बताया गया कि छह अस्पतालों में ही अब तक कम से कम 217 प्रदर्शनकारियों की मौत हुई है. इसके समानांतर सरकारी मीडिया प्रदर्शनकारियों को ‘आतंकी’ और ‘तोड़फोड़ करने वाले’ बताकर कार्रवाई का माहौल बना रहा है.

खामेनेई का ट्रंप पर तीखा वार

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने ट्रंप पर हमला बोलते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के ‘हाथ ईरानियों के खून से सने हैं.’ यह बयान इजरायल के साथ जून में हुए युद्ध और उसमें अमेरिकी समर्थन के संदर्भ में दिया गया. एक भाषण में खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों पर भी निशाना साधा, जबकि उनके समर्थकों ने ‘डेथ टू अमेरिका’ के नारे लगाए. उन्होंने कहा कि इस्लामिक गणराज्य खून देकर बना है और वह दबाव में नहीं झुकेगा. खामेनेई ने यहां तक कहा कि ट्रंप का अंजाम भी 1979 में ईरान के शाह जैसा हो सकता है.

ट्रंप का आक्रामक रुख और नई चेतावनी

उधर, ट्रंप ने हालात को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ईरान ‘बहुत बड़ी मुसीबत’ में है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि ईरान की सरकार के लिए बेहतर होगा कि वह प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाना बंद करे, वरना अमेरिका भी गोली चलाएगा. ट्रंप ने साफ किया कि इसका मतलब जमीनी सैन्य कार्रवाई नहीं है, लेकिन ईरान को ‘जहां दर्द होगा, वहीं चोट’ दी जाएगी. एक इंटरव्यू में उन्होंने यह संकेत भी दिया कि 86 वर्षीय खामेनेई शायद देश छोड़ने की तैयारी में हों.

इंटरनेट शटडाउन

प्रदर्शनों को दबाने के लिए ईरान ने देशव्यापी इंटरनेट शटडाउन लागू कर दिया है. नेटब्लॉक्स और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताया है. एमनेस्टी के अनुसार इंटरनेट बंद करने का मकसद हिंसा और मौतों की असली तस्वीर दुनिया से छिपाना है. नॉर्वे स्थित एनजीओ ‘ईरान ह्यूमन राइट्स’ ने कहा है कि मरने वालों में कम से कम नौ बच्चे भी शामिल हैं.

भारत की नजर और भारतीयों की सुरक्षा

इस बीच भारत ने स्थिति पर करीबी नजर रखने की बात कही है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक ईरान में करीब 10,000 भारतीय नागरिक और भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जिनकी सुरक्षा को लेकर एडवाइजरी जारी की गई है. तेहरान समेत कई बड़े शहरों में हजारों लोग ‘तानाशाह मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाते हुए सड़कों पर उतर आए हैं. ये प्रदर्शन 2022–23 में महसा अमीनी की मौत के बाद हुए आंदोलनों के बाद सबसे बड़े माने जा रहे हैं और 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद सत्ता के लिए सबसे बड़ी चुनौती के रूप में देखे जा रहे हैं.

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