मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर, अमेरिका-ईरान वार्ता विफल होने की आशंका, कई देशों ने नागरिकों को निकलने की दी सलाह

मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है. क्या आने वाला है बड़ा युद्ध होगा? अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते की बातचीत फेल हो गई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बेहद निराश हैं और साफ कह चुके हैं -मैं बातचीत से खुश नहीं हूं, ईरान को समझौता करना चाहिए वरना मजबूरन कड़ा फैसला लेना पड़ेगा.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और संभावित क्षेत्रीय युद्ध की आशंकाओं के बीच अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, भारत समेत कई देशों ने अपने नागरिकों तथा दूतावास कर्मचारियों के लिए सख्त एडवाइजरी जारी कर दी है. स्थिति तब और गंभीर हो गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हवाई हमलों को टालने वाली कूटनीतिक बातचीत पर खुलकर निराशा जताई. ट्रंप का कड़ा रुख और सैन्य तैनाती ने पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है.

ट्रंप ने टेक्सास में मीडिया से बातचीत में कहा कि वे वार्ता से खुश नहीं हैं और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति कभी नहीं दी जाएगी. वहीं ओमान जैसे मध्यस्थ देशों ने प्रगति की बात कही है, लेकिन अमेरिकी पक्ष से निराशा के संकेत साफ दिख रहे हैं.

ट्रंप का सख्त ऐलान और मीटुंग की...

टेक्सास में मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने कहा- मैं बातचीत से खुश नहीं हूं. हम अभी बातचीत कर रहे हैं, लेकिन वे सही नतीजे पर नहीं पहुंच रहे हैं. यह पूछे जाने पर कि वह सैन्य हमलों का फैसला करने के कितने करीब हैं, ट्रंप ने स्पष्ट जवाब देने से इनकार करते हुए कहा- मैं आपको यह बताना पसंद नहीं करूंगा. उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती.

जिनेवा में हाल ही हुई अमेरिका-ईरान वार्ता के बाद अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर निराश होकर लौटे. अगली तकनीकी बातचीत सोमवार को वियना में संभावित है. दूसरी ओर ईरान और मध्यस्थ ओमान ने प्रगति पर सकारात्मक संकेत दिए. ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी ने वाइट हाउस में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मुलाकात के बाद कहा-शांति हमारी पहुंच में है.

दूतावास खाली करने के निर्देश और यात्रा परामर्श

अमेरिका ने यरूशलेम (इजरायल) में गैर-आपातकालीन कर्मचारियों को देश छोड़ने की अनुमति दी है. अमेरिका को डर है कि ईरान पर हमला होने पर इजरायल शामिल होता है तो ईरान जवाबी हमला कर सकता है. पहले बेरूत के लिए भी ऐसा आदेश जारी हुआ था.

भारत और अन्य देशः भारत, ब्रिटेन, चीन, ऑस्ट्रेलिया, पोलैंड, फिनलैंड, स्वीडन और सिंगापुर ने अपने नागरिकों और राजनयिकों को मध्य पूर्व के कुछ हिस्सों से निकलने की सलाह दी है. साथ ही ब्रिटेन ने ईरान से अपने राजनयिक कर्मचारियों को अस्थायी रूप से वापस बुलाने की घोषणा की है.

सैन्य तैनाती और इजरायल पर प्रभाव

कूटनीति के दावों के बावजूद अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है. दूसरा अमेरिकी विमानवाहक पोत USS जेराल्ड आर. फोर्ड क्षेत्र में पहुंच चुका है और इजरायली जलक्षेत्र में तैनात है.

उड़ानें रद्दः कई एयरलाइंस ने तेल अवीव के लिए उड़ानें निलंबित कर दी हैं. अमेरिकी दूतावास ने यरूशलेम के ओल्ड सिटी और वेस्ट बैंक में यात्रा पर रोक लगाई है.

इजरायली अर्थव्यवस्था पर मारः संभावित संघर्ष के डर से इजरायल के वित्तीय बाजारों पर दबाव है. शेकेल मुद्रा में पिछले साल जून के 12-दिवसीय युद्ध के बाद से दो दिनों की सबसे भारी गिरावट आई है.

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

अमेरिकी हमलों की आशंका से कच्चे तेल की कीमतें 3.2% बढ़कर 73 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गईं, जो जुलाई के बाद सबसे अधिक है. हालांकि ट्रंप ने तेल कीमतों की चिंता को दरकिनार करते हुए कहा- मुझे लोगों की जान और इस देश के दीर्घकालिक स्वास्थ्य की अधिक परवाह है. लाल सागर में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की सक्रियता और सुरक्षा खतरों से प्रमुख शिपिंग कंपनियां A.P. Moller-Maersk और Hapag-Lloyd ने जहाजों का रूट बदल दिया है. अब ये जहाज स्वेज नहर के बजाय अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से से लंबा चक्कर लगा रहे हैं.

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