यह ड्रग नहीं, जहर है...ट्रंप के सख्ती के बावजूद US में तेजी से बढ़ रहा गुलाबी कोकिन का खतरा

अमेरिका में सख्त ड्रग अभियान के बावजूद पिंक कोकीन नामक खतरनाक नशा तेजी से फैल रहा है. यह कोकीन नहीं, बल्कि कई नशीले पदार्थों का घातक मिश्रण है, जो क्लबों से होते हुए अब ग्रामीण इलाकों तक पहुंच चुका है. इसके सेवन से ओवरडोज और मौत का खतरा बढ़ गया है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में नशे के कारोबार पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है. कैरेबियन क्षेत्र में ड्रग तस्करों की नौकाओं पर हमले किए जा रहे हैं, वेनेजुएला जैसे देशों में सैन्य अभियान चलाए जा रहे हैं और भारी मात्रा में मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं. इसके बावजूद अमेरिका में एक नया और बेहद खतरनाक ड्रग तेजी से फैल रहा है, जिसे पिंक कोकीन या तुसी (Tuci) कहा जाता है. यह ड्रग अब क्लबों और पार्टियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में भी पहुंच चुका है.

क्या है पिंक कोकीन और क्यों है इतना खतरनाक

नाम के बावजूद पिंक कोकीन असल में कोकीन नहीं है. यह कई नशीले पदार्थों का एक घातक मिश्रण होता है, जिसमें आमतौर पर केटामाइन और एमडीएमए शामिल रहते हैं. कई मामलों में इसमें मेथामफेटामाइन, ओपिओइड्स और फेंटानिल जैसे जानलेवा तत्व भी पाए गए हैं. इसे आकर्षक दिखाने के लिए गुलाबी रंग मिलाया जाता है, जिससे यह युवाओं को ‘ट्रेंडी’ लगता है. समस्या यह है कि हर बैच की संरचना अलग होती है, जिससे इसकी तीव्रता का अंदाजा लगाना लगभग नामुमकिन हो जाता है.

ओवरडोज से जान जाने का खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पिंक कोकीन का सेवन बेहद जोखिम भरा है. ओवरडोज की स्थिति में सांस रुकना, दिल की धड़कन का अनियमित होना और शरीर में ऑक्सीजन की कमी जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. कई मामलों में व्यक्ति की हालत इतनी बिगड़ जाती है कि उसे बचाना मुश्किल हो जाता है. इसी वजह से डॉक्टर इसे ड्रग नहीं, बल्कि धीमा जहर मानते हैं.

बड़े शहरों से ग्रामीण इलाकों तक फैलाव
हाल के महीनों में लॉस एंजिल्स, मियामी, न्यूयॉर्क और कोलोराडो स्प्रिंग्स जैसे शहरों में पिंक कोकीन से जुड़े छापे और चेतावनियां जारी की गई हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, सितंबर 2020 से जुलाई 2024 के बीच कई मौतों का संबंध इस ड्रग से पाया गया. अकेले 2024 की शुरुआत से चार अलग-अलग राज्यों में इसके कम से कम 18 गंभीर मामले सामने आए, जिनमें अधिकांश लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा.

कहां से हुई इस ड्रग की शुरुआत
विशेषज्ञों का मानना है कि पिंक कोकीन की शुरुआत कोलंबिया से हुई, जहां इसे पार्टी और क्लब ड्रग के रूप में प्रचारित किया गया. इसे साइकेडेलिक ड्रग 2सी से प्रेरित होकर ‘तुसी’ नाम दिया गया और गुलाबी रंग को इसकी पहचान बनाया गया. धीरे-धीरे यह लैटिन अमेरिका से होते हुए अमेरिका और यूरोप तक फैल गया.

क्यों रोकना हो रहा है मुश्किल
पिंक कोकीन को लेकर सबसे बड़ी चिंता यह है कि इसका कोई तय फॉर्मूला नहीं होता. तस्कर उपलब्ध नशीले पदार्थों को मिलाकर हर बार नया मिश्रण तैयार कर लेते हैं. यही वजह है कि इसका कोई निश्चित इलाज या एंटीडोट मौजूद नहीं है. डॉक्टर केवल सहायक इलाज दे पाते हैं और कई बार मरीज की जान बचा पाना संभव नहीं हो पाता. बढ़ता फैलाव और अनियंत्रित संरचना इसे अमेरिका के लिए एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बना रही है.

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