क्रेडिट कार्ड ब्याज पर ट्रंप का वार, बैंकिंग सेक्टर में मची खलबली
क्रेडिट कार्ड ब्याज दरों पर सीमा लगाने के ट्रंप के ऐलान ने अमेरिकी बैंकिंग सेक्टर में उथल-पुथल मचा दी है. बड़े बैंक इस फैसले को अर्थव्यवस्था और वित्तीय स्थिरता के लिए खतरा बता रहे हैं.

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के क्रेडिट कार्ड ब्याज दरों को सीमित करने के प्रस्ताव ने अमेरिका के बैंकिंग जगत में भूचाल ला दिया है. उपभोक्ताओं को राहत देने के नाम पर लाए गए इस कदम के खिलाफ देश के सबसे बड़े बैंकों और वित्तीय संस्थानों के प्रमुख खुलकर सामने आ गए हैं. उनका मानना है कि यह फैसला बैंकिंग उद्योग ही नहीं, बल्कि पूरी अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है.
मध्यावधि चुनावों से पहले ट्रंप ने ‘किफायती लागत’ को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाते हुए क्रेडिट कार्ड पर ब्याज दरों की सीमा तय करने का संकेत दिया है. हालांकि, बाजार और बैंकिंग सेक्टर इसे मुक्त अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों के खिलाफ मान रहा है और इसे वित्तीय स्थिरता के लिए खतरा बता रहा है.
ट्रंप का फरमान और बदला हुआ रुख
डोनाल्ड ट्रंप ने इशारा किया है कि वह क्रेडिट कार्ड की ब्याज दरों पर एक साल के लिए 10 प्रतिशत की अधिकतम सीमा लागू करना चाहते हैं. उनका कहना है कि इससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी और महंगे कर्ज के बोझ से छुटकारा मिलेगा.
लेकिन बैंकिंग जगत का तर्क है कि यह कदम बाजार आधारित व्यवस्था में सरकारी हस्तक्षेप है, जिससे पूरी वित्तीय प्रणाली में अनिश्चितता बढ़ सकती है.
पहले सहयोग और अब टकराव
शुरुआत में ट्रंप प्रशासन के कई फैसलों को बैंकों ने अपने पक्ष में माना था. जुलाई में ‘वन बिग ब्यूटीफुल बिल’ पर हस्ताक्षर के बाद कर कटौती का नया दौर शुरू हुआ और उपभोक्ता वित्तीय संरक्षण ब्यूरो के बजट में लगभग 50 प्रतिशत की कटौती की गई.नियामकीय ढील और टैक्स राहत से बैंक और बड़े कॉरपोरेट खुश थे, लेकिन क्रेडिट कार्ड ब्याज पर सीमा लगाने के प्रस्ताव ने इस रिश्ते में दरार डाल दी है.
फेड की स्वतंत्रता पर उठे सवाल
बीएनवाई मेलॉन के सीईओ रॉबिन विंस ने आगाह किया कि ब्याज दरों में राजनीतिक दखल से फेडरल रिजर्व की स्वायत्तता खतरे में पड़ सकती है. उनके अनुसार इससे बॉन्ड बाजार कमजोर हो सकता है और ब्याज दरें घटने के बजाय बढ़ भी सकती हैं.
बैंकों की साझा चिंता यह है कि अगर फेड पर निवेशकों का भरोसा डगमगाया तो उधारी और महंगी हो जाएगी.
शेयर बाजार में दिखी बेचैनी
ट्रंप के इस प्रस्ताव के बाद क्रेडिट कार्ड कंपनियों और बड़े बैंकों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई. अमेरिकन एक्सप्रेस, जेपी मॉर्गन, सिटीग्रुप और कैपिटल वन जैसी कंपनियों के शेयर फिसल गए.
निवेशकों को आशंका है कि ब्याज दरों पर सीमा लगने से बैंकों के मुनाफे पर बड़ा असर पड़ेगा और पूरे क्रेडिट कार्ड कारोबार का ढांचा बदल सकता है.
उद्योग की जवाबी रणनीति
जेपी मॉर्गन के मुख्य वित्तीय अधिकारी जेफरी बार्नम ने साफ संकेत दिया कि बैंकिंग सेक्टर इस फैसले के खिलाफ हर कानूनी और नीतिगत रास्ता अपनाएगा. उन्होंने कहा कि यदि ब्याज दरों पर सीमा लागू की गई तो उद्योग इसे चुनौती देगा.
जेपी मॉर्गन चेस के सीईओ जेमी डिमोन ने कहा कि वे फेडरल रिजर्व के हर फैसले से सहमत न हों, लेकिन चेयरमैन जेरोम पॉवेल के प्रति उनके मन में सम्मान है. उन्होंने जोर देकर कहा कि वित्तीय स्थिरता के लिए केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता बेहद जरूरी है.
कम आय वर्ग पर असर की चेतावनी
डेल्टा एयरलाइंस के सीईओ एड बैस्टियन ने चेताया कि ब्याज दरों पर सीमा लगाने का सबसे ज्यादा नुकसान कम आय वाले उपभोक्ताओं को होगा. उनके मुताबिक, जोखिम बढ़ने पर बैंक ऐसे ग्राहकों को क्रेडिट देना ही बंद कर सकते हैं, जिससे उनकी वित्तीय पहुंच और सीमित हो जाएगी.
स्वाइप फीस पर भी वार
तनाव को और बढ़ाते हुए ट्रंप ने सीनेटर रोजर मार्शल द्वारा पेश ‘क्रेडिट कार्ड प्रतिस्पर्धा अधिनियम’ का समर्थन किया है. इस विधेयक का मकसद व्यापारियों से वसूले जाने वाले ‘स्वाइप शुल्क’ पर नियंत्रण लगाना है.बैंकों को डर है कि यह कदम उनके राजस्व पर एक और सीधा प्रहार साबित होगा.
आगे की जंग
क्रेडिट कार्ड ब्याज घटाने के ट्रंप के फैसले ने अमेरिकी बैंकिंग सेक्टर को एकजुट कर दिया है. यह टकराव अब सिर्फ नीतिगत नहीं, बल्कि राजनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर भी अहम बन चुका है. आने वाले समय में यही संघर्ष तय करेगा कि अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था में नीति भारी पड़ेगी या बाजार की स्वतंत्रता.


