रूस-यूक्रेन युद्ध पर ट्रंप के बदले सुर, रशिया को बताया कागजी शेर, बोले- अपनी खोई जमीन वापस ले सकता है यूक्रेन

Donald Trump Ukraine Policy Shift : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर अपनी पूर्व नीति से उलट,अब यूक्रेन और नाटो का खुला समर्थन किया है. उन्होंने यूक्रेन की जीत को संभव बताया और नाटो देशों से रूसी विमानों को मार गिराने की बात कही. यह पलटाव चौंकाने वाला है क्योंकि हाल ही में उन्होंने पुतिन को "अच्छा दोस्त" बताया था और यूक्रेन को जमीन छोड़ने की सलाह दी थी.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

Donald Trump Ukraine Policy Shift : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो पहले यह दावा करते रहे थे कि वे रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के कगार पर हैं, अब अचानक एकदम विपरीत रुख अपनाते हुए यूक्रेन और नाटो देशों को मॉस्को के खिलाफ सैन्य रूप से समर्थन देने की वकालत कर रहे हैं. ट्रंप ने कहा कि यूक्रेन “अपना खोया हुआ क्षेत्र वापस जीत सकता है,” और उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नाटो देशों को अपनी हवाई सीमाओं का उल्लंघन करने वाले रूसी जेट विमानों को मार गिराना चाहिए.

पहली बार ऐसा बोले राष्ट्रपति ट्र्ंप 
आपको बता दें कि यह पहला मौका है जब ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने के बाद यूक्रेन को रूसी कब्जे वाले क्षेत्रों को वापस लेने की संभावना के बारे में इतनी स्पष्टता से बात की है. जबकि इससे पहले वे बार-बार सुझाव देते रहे थे कि कीव को शांति समझौते के तहत कुछ क्षेत्र रूस को सौंपने पड़ सकते हैं.

“पुतिन अच्छे मित्र हैं” से “यूक्रेन जीत सकता है” तक...

दरअसल, ट्रंप का यह यू-टर्न और भी चौंकाने वाला इसलिए है क्योंकि कुछ ही दिन पहले ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को “अच्छा मित्र” कहा था. 15 अगस्त को वे अलास्का में पुतिन से मिले थे और दोनों ने ‘द बीस्ट’ नामक एक ही वाहन में यात्रा कर अपनी करीबी दिखाने की कोशिश भी की थी. हालांकि, संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात में ट्रंप ने कहा कि पुतिन के साथ उनकी “दोस्ती” का कोई खास फायदा नहीं हुआ और यह रिश्ता अब “अप्रासंगिक” साबित हो चुका है.

नाटो पर बदला नजरिया, पुराने रुख से पूरी तरह अलग
ट्रंप की यह नई स्थिति नाटो को लेकर उनके पुराने रुख से भी पूरी तरह अलग है. अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने नाटो को “अप्रासंगिक” बताया था और बार-बार कहा था कि यह संगठन आतंकवाद जैसे आधुनिक खतरों से निपटने में असफल रहा है. उन्होंने 2018 में नाटो सम्मेलन के दौरान यह तक कह दिया था कि सदस्य देशों को अमेरिका को अरबों डॉलर देने चाहिए, क्योंकि वे अपनी रक्षा जिम्मेदारियों को पूरा नहीं कर रहे. यहां तक कि फरवरी 2024 के चुनावी अभियान में उन्होंने यह चेतावनी दी थी कि वे रूस को उन देशों पर हमला करने के लिए उकसा सकते हैं जो नाटो के रक्षा बजट लक्ष्य को पूरा नहीं करते.

पहले के रवैये से ठीक विपरीत 
इसके साथ ही ट्रंप 2025 की शुरुआत तक नाटो की सामूहिक सुरक्षा की धारणा पर ही सवाल उठा रहे थे, जिससे यूरोपीय नेताओं को अपनी रक्षा नीति पर पुनर्विचार करने पर मजबूर होना पड़ा. अब जबकि वही ट्रंप यह कह रहे हैं कि नाटो को रूसी युद्धक विमानों को मार गिराना चाहिए, यह उनके पहले के रवैये के ठीक विपरीत है और इससे यूरोप-रूस संबंधों पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है.

यूक्रेन को “पूरी जमीन” वापस लेने की बात
ट्रंप का सबसे बड़ा पलटाव शायद इस बात को लेकर है कि वे अब मानते हैं कि यूरोपीय संघ के समर्थन से यूक्रेन न केवल खुद को बचा सकता है, बल्कि 2014 के बाद रूस द्वारा कब्जा की गई ज़मीन को भी वापस ले सकता है. यह वही ट्रंप हैं जो फरवरी में ओवल ऑफिस में यह सुझाव दे रहे थे कि यूक्रेन को शांति के बदले कुछ क्षेत्रों को रूस को सौंप देना चाहिए. उन्होंने यह विचार अगले छह महीनों में कम से कम तीन बार दोहराया था, जिसे यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने बार-बार सिरे से खारिज किया.

ट्रंप के बयान से चौंके राजनीतिक पर्यवेक्षक 
अब जब ट्रंप कह रहे हैं कि यूक्रेन "जीत" सकता है, तो राजनीतिक पर्यवेक्षक चौंक गए हैं. राजनीतिक विश्लेषक इयान ब्रेमर ने टिप्पणी की, “नौ महीने में ट्रंप का पूरा 180 डिग्री पलटाव हो गया है. आज की स्थिति है, कल बदल सकती है.” वहीं स्पेंसर हकीमियन ने लिखा, “ट्रंप ने यूक्रेन पर अपनी नीति पूरी तरह पलट दी है.”

प्रतिक्रियाएं मिली-जुली, समर्थन और संदेह दोनों
इस नाटकीय बदलाव पर राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रियाएं भी आई हैं. कुछ लोग जहां ट्रंप के इस रुख का स्वागत कर रहे हैं, वहीं कई विश्लेषक इसे उनकी रणनीतिक स्थिति का अस्थायी झुकाव मानते हैं. पूर्व उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने कहा, “यूक्रेन ने बहादुरी से लड़ाई लड़ी है और अमेरिका के नेतृत्व व नाटो के समर्थन से जीत सकता है. धन्यवाद ट्रंप.” वहीं कीव के सुरक्षा विश्लेषक जिमी रुश्टन ने टिप्पणी की कि “शायद ट्रंप को अब समझ आ गया है कि पुतिन उनके मित्र नहीं हैं.”

हालांकि कुछ विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ट्रंप अमेरिका के वैश्विक प्रभाव का अति-मूल्यांकन कर रहे हैं और उनके ये आक्रामक बयानों से रूस और भी सख्त रवैया अपना सकता है. रूसी विश्लेषक एलेना पानिना का कहना है कि ट्रंप की "काउबॉय जैसी आक्रामकता" पश्चिमी जगत के पुराने प्रभुत्ववादी सोच की गलतफहमी का परिणाम है.

क्या यह रुख स्थायी है या एक और “बैकफ्लिप” होगा?
डोनाल्ड ट्रंप का यह स्पष्ट और तीखा बदलाव यूक्रेन से जमीन सौंपने की बात से लेकर उसे संपूर्ण विजय की स्थिति तक पहुंचाने की बात तक पूरी दुनिया को चौंका रहा है. सवाल यही है: क्या यह उनकी स्थायी नीति है या आने वाले समय में वे फिर से पलटी मार सकते हैं? जैसा कि उनके अतीत ने कई बार दिखाया है, ट्रंप की नीतिगत स्थिरता अक्सर उनके व्यक्तिगत और राजनीतिक समीकरणों पर निर्भर करती है. इस बदलाव के परिणाम और उसका प्रभाव आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होगा.

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