शांति पुरस्कार न मिलने पर भड़के ट्रंप, नॉर्वे के पीएम को भेजा कड़ा पत्र
डोनाल्ड ट्रंप ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने के बाद अब वह सिर्फ शांति नहीं, बल्कि अमेरिकी हितों को प्राथमिकता देंगे. उन्होंने ग्रीनलैंड पर डेनमार्क की संप्रभुता, नाटो की भूमिका और ओबामा को मिले नोबेल पुरस्कार पर भी सवाल उठाए.

अमेरिकी राजनीति और कूटनीति में एक बार फिर डोनाल्ड ट्रंप के बयान सुर्खियों में हैं. पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग सर्विस (PBS) की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोरे को एक पत्र भेजा, जिसमें उन्होंने नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की.
ट्रंप ने संदेश में क्या लिखा?
ट्रंप ने पत्र में संकेत दिया कि पुरस्कार न मिलने के बाद अब वह केवल “शांति” के नैरेटिव तक सीमित रहने को खुद पर बाध्य नहीं मानते और आगे अमेरिकी राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे. ट्रंप ने अपने संदेश में लिखा कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई बड़े संघर्षों को टालने और युद्ध जैसी स्थितियों को रोकने में भूमिका निभाई. इसके बावजूद उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से वंचित रखा गया. उन्होंने कहा कि शांति उनके लिए अब भी अहम है, लेकिन अब वे यह भी खुलकर सोचेंगे कि अमेरिका के लिए क्या सही और लाभकारी है.
ट्रंप ने नॉर्वे की उस भूमिका की ओर भी इशारा किया, जिसमें नोबेल शांति पुरस्कार का आयोजन और संचालन शामिल है और इसे अपनी व्यापक विदेश नीति से जोड़ा. पत्र में ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर भी विवादित टिप्पणी की. उन्होंने डेनमार्क की ग्रीनलैंड पर संप्रभुता पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था इस क्षेत्र को रूस और चीन जैसी बड़ी ताकतों से सुरक्षित नहीं रख सकती. ट्रंप का तर्क था कि डेनमार्क के पास ग्रीनलैंड पर स्वामित्व का कोई ठोस लिखित आधार नहीं है, बल्कि यह केवल ऐतिहासिक दावों पर टिका हुआ है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की मौजूदगी के बिना ग्रीनलैंड और वैश्विक सुरक्षा दोनों खतरे में रहेंगे.
नाटो को लेकर ट्रंप का सख्त रुख
नाटो को लेकर भी ट्रंप ने सख्त रुख अपनाया. उन्होंने दावा किया कि नाटो की स्थापना के बाद से किसी भी अन्य अमेरिकी नेता की तुलना में उन्होंने इस सैन्य गठबंधन के लिए ज्यादा योगदान दिया है. ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि अब नाटो सहयोगियों को भी अमेरिका के हितों के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए. उनके अनुसार, जब तक ग्रीनलैंड पर अमेरिका का पूर्ण और प्रभावी नियंत्रण नहीं होगा, तब तक वैश्विक सुरक्षा अधूरी रहेगी.
इसके अलावा ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर दावा किया कि उनके फैसलों और सैन्य नीतियों की वजह से दुनिया भर में लाखों लोगों की जान बची है. उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में अमेरिकी सेना को फिर से मजबूत किया गया, जिससे चीन और रूस जैसी ताकतों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बना. साथ ही, उन्होंने नाटो देशों की आलोचना दोहराई, जो उनके अनुसार वर्षों तक रक्षा खर्च में पीछे रहे.
ट्रंप ने इस पूरे संदर्भ में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को भी निशाने पर लिया. उन्होंने सवाल उठाया कि ओबामा को 2009 में नोबेल शांति पुरस्कार क्यों दिया गया, जब उन्होंने राष्ट्रपति पद संभालते ही यह सम्मान पा लिया था. ट्रंप के मुताबिक, यह पुरस्कार ऐसे समय में दिया गया जब ओबामा ने कोई ठोस उपलब्धि हासिल नहीं की थी.


