ईरान युद्ध के बीच अमेरिका से बगावत पर उतरा UAE, डॉलर छोड़ चीनी युआन में होगी सारी डील!
UAE ने चेतावनी दी है कि यदि युद्ध की वजह से अमेरिकी डॉलर की किल्लत हुई तो वह तेल और गैस का सौदा चीनी युआन या किसी और मुद्रा में करने पर मजबूर होगा।

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष की आंच अब संयुक्त अरब अमीरात तक पहुंच गई है। UAE ने साफ शब्दों में इस जंग के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। लगातार बिगड़ते हालात से UAE का सब्र टूट रहा है और इसी कारण उसने अमेरिका को कड़े शब्दों में चेतावनी भी दी।
यूएई तेल कारोबार में युआन अपनाने की दी धमकी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार UAE ने चेतावनी दी है कि यदि युद्ध की वजह से अमेरिकी डॉलर की किल्लत हुई तो वह तेल और गैस का सौदा चीनी युआन या किसी और मुद्रा में करने पर मजबूर होगा। दरअसल डॉलर की कमी से उसका आयात-निर्यात बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
वॉशिंगटन में हुई हाई लेवल बैठक
इस धमकी से पहले पिछले हफ्ते ही UAE सेंट्रल बैंक के गवर्नर खालिद मोहम्मद बालामा ने वॉशिंगटन में अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट और फेडरल रिजर्व के अधिकारियों से मुलाकात की थी। इस बैठक में उन्होंने डॉलर स्वैप लाइन शुरू करने का प्रस्ताव रखा ताकि लिक्विडिटी बनी रहे। अमीराती अधिकारियों का कहना है कि ईरान-इजरायल युद्ध ने पूरे मिडिल ईस्ट की अर्थव्यवस्था को हिला दिया है।
UAE का यह भी मानना है कि युद्ध ने उसकी अर्थव्यवस्था को जोखिम में डाल दिया है। विदेशी निवेशक घबराए हुए हैं और देश से पैसा बाहर जाने का डर बढ़ गया है। अब तक UAE ने आर्थिक झटकों को संभाला है, लेकिन यदि डॉलर की कमी लंबी चली तो उसे युआन जैसी वैकल्पिक मुद्राओं की तरफ देखना पड़ेगा।
सुरक्षा के लिए UAE अब भी अमेरिका पर निर्भर
गौरतलब है कि ईरान ने इजरायल के साथ तनाव बढ़ने पर UAE समेत खाड़ी देशों पर 2800 से ज्यादा ड्रोन और मिसाइल दागे। ज्यादातर को रोक लिया गया, लेकिन इस घटना ने UAE को सुरक्षा के लिए अमेरिका के और करीब ला दिया। पहले UAE ईरान से रिश्ते सुधार कर क्षेत्रीय स्थिरता चाहता था।
हाल ही में आई S&P ग्लोबल की एक रिपोर्ट के मुताबिक UAE के पास मजबूत वित्तीय बफर हैं, पर लंबा संकट तेल निर्यात और विकास दोनों को नुकसान पहुंचाएगा। हाल में UAE और बहरीन ने लिक्विडिटी बनाए रखने के लिए अरबों डॉलर का कर्ज भी लिया है। ऐसे यूएई की निर्भरता अमेरिका पर और भी बढ़ जाती है।


