युद्ध के बीच ईरान में बड़ा बदलाव, नए सुपर पावर बने मेजर जनरल वाहिदी!

अमेरिकी थिंक टैंक इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर और न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट्स के अनुसार मेजर जनरल अहमद वाहिदी अब ईरान के सबसे प्रभावशाली नेता बनकर उभरे हैं।

Sachin Hari Legha

नई दिल्ली: ईरान में सत्ता का गहरा संतुलन बदल गया है। पिछले 48 घंटों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने न सिर्फ सैन्य फैसलों पर, बल्कि देश की पूरी विदेश नीति पर भी मजबूत पकड़ बना ली है।

अमेरिकी थिंक टैंक इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर और न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट्स के अनुसार मेजर जनरल अहमद वाहिदी अब ईरान के सबसे प्रभावशाली नेता बनकर उभरे हैं। सर्वोच्च नेता मोज्तबा खामेनेई की चुप्पी को इस बदलाव पर मौन सहमति माना जा रहा है।

होर्मुज स्ट्रेट पर तनाव, जहाजों की आवाजाही रुकी 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस पावर शिफ्ट का सबसे खतरनाक प्रभाव स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में दिख रहा है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस रणनीतिक जलमार्ग को खोलने के पक्ष में थे, लेकिन IRGC ने उनके फैसले को पलट दिया। वाहिदी के निर्देश पर ईरान की फास्ट अटैक बोट्स ने क्षेत्र को ब्लॉक कर दिया।

पिछले दो दिनों में कम से कम तीन जहाजों को निशाना बनाया गया। इससे सैकड़ों अंतर्राष्ट्रीय जहाज फारस की खाड़ी में फंस गए हैं। समुद्री ट्रैकिंग डेटा भी यही दिखाता है कि होर्मुज की नौकायन पूरी तरह ठप हो चुकी है। केवल ईरानी जहाज ही सीमित रूप से गुजर रहे हैं, लेकिन वे भी अमेरिकी नाकाबंदी वाली लाइन के पास नहीं आ रहे।

ईरान में कूटनीति पर IRGC का कब्जा 

इस बीच पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान के बीच चल रही अप्रत्यक्ष बातचीत भी इस बदलाव का शिकार हो गई। IRGC ने कूटनीतिक टीम में कट्टरपंथी नेता मोहम्मद बागेर जोलगाद्र को शामिल करने की कोशिश की। संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ और अराघची ने इसका विरोध किया, लेकिन बाद में जोलगाद्र ने अराघची पर 'नरमी' बरतने का आरोप लगाते हुए शिकायत कर दी।

नतीजा यह हुआ कि पूरी ईरानी डेलिगेशन को तेहरान वापस बुला लिया गया। थिंक टैंक के अनुसार अब अमेरिका के साथ कोई सार्थक वार्ता लगभग नामुमकिन हो गई है। मंगलवार (21 अप्रैल 2026) की डेडलाइन करीब है और सीजफायर की उम्मीद कमजोर पड़ती जा रही है।

क्या फिर से शुरू होगा नया संघर्ष? 

गौरतलब है कि वाहिदी और उनके समर्थकों ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अमेरिका की मांगें स्वीकार्य नहीं हैं। IRGC से जुड़े मीडिया ने बातचीत ठुकराने की पुष्टि भी की। विश्लेषकों का मानना है कि इस सैन्य-कूटनीतिक कब्जे के बाद ईरान-अमेरिका के बीच तनाव का नया दौर शुरू हो सकता है। 

दरअसल ईरान में नरमपंथी ताकतों की आवाज दब गई है और 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' वाली सख्त नीति फिर से मजबूत होती दिख रही है। दुनिया अब इस बात का इंतजार कर रही है कि अगले कुछ दिनों में क्या फैसला होता है, शांति की कोशिश या फिर बड़े संघर्ष की आशंका भी जताई जा रही है।

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