होर्मुज बंद होते ही भारत का ये पोर्ट अचानक बना नया गेटवे, दुनिया के लिए बना 'संकटमोचक'

अमेरिका-ईरान तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रूकावट आई है. शशि थरूर ने बताया कि इस संकट ने शिपिंग की नजरें विझिंजम की ओर मोड़ दी हैं. अब एक साथ पांच बड़े जहाजों को संभालने की तैयारी चल रही है.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिका-ईरान तनाव के कारण मार्च-अप्रैल 2026 से भारी रुकावट आई है. 29 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद यहां बिना अनुमति के जहाजों का गुजरना मुश्किल हो गया. इससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई और तेल-गैस समेत माल ढुलाई पर असर पड़ा. ऐसे समय में भारत के केरल में तिरुवनंतपुरम के पास बने विझिंजम पोर्ट ने दुनिया के लिए नया विकल्प बनकर उभरा है.

होर्मुज संकट का असर और विझिंजम की भूमिका

होर्मुज संकट ने वैश्विक शिपिंग को नई दिशा दी है. तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि इस संकट ने शिपिंग की नजरें विझिंजम की ओर मोड़ दी हैं. यहां फिलहाल 100 जहाज कतार में खड़े हैं या आने का इंतजार कर रहे हैं. मार्च 2026 में ही पोर्ट ने 61 जहाजों को हैंडल किया, जो नया रिकॉर्ड है. एक साथ पांच बड़े जहाजों को संभालने की तैयारी चल रही है.

थरूर ने लिखा, “जब मैंने इस पोर्ट के टेंडर में मदद की थी, तब कई संशय थे. आज विझिंजम न सिर्फ भारत का ट्रांसशिपमेंट जवाब है, बल्कि दुनिया की जरूरत बन गया है.” उन्होंने कहा कि होर्मुज में रुकावट के बीच विश्वसनीय गेटवे की तलाश में विझिंजम ने अपनी जगह बना ली है.

विझिंजम पोर्ट की खासियत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मई 2025 में इस पोर्ट का उद्घाटन किया था. अदाणी ग्रुप और केरल सरकार के सहयोग से बना यह भारत का पहला डीप वॉटर ट्रांसशिपमेंट हब है. इसकी गहराई 20 मीटर से ज्यादा है, इसलिए बहुत बड़े जहाज आसानी से आ सकते हैं.

पहले चरण में इसकी क्षमता 10 लाख टीईयू (20 फीट वाले कंटेनर) है. पूरा बनने पर यह 62 लाख टीईयू तक पहुंच जाएगी. लागत करीब 8,800 करोड़ रुपये है. पहले भारत में बड़े जहाजों के लिए कोलंबो या सिंगापुर जैसे विदेशी पोर्ट पर निर्भर रहना पड़ता था. सामान वहां उतारकर छोटे जहाजों से भारत लाया जाता था. अब विझिंजम से सीधे बड़े जहाज आ सकते हैं, जिससे समय और खर्च दोनों बचते हैं.

विरोध से सफलता तक

पोर्ट बनते समय स्थानीय लोगों और कुछ राजनीतिक दलों ने विरोध किया था. मछुआरों की चिंताएं भी थी, लेकिन अब यह पोर्ट भारत को वैश्विक समुद्री मानचित्र पर मजबूत जगह दे रहा है. यह कोलंबो और सिंगापुर जैसे हब से मुकाबला करने के साथ नया मानक भी स्थापित कर रहा है.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो