क्या मोटापा बन सकता है ओवरी कैंसर की वजह? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

Ovarian Cancer: ओवरी कैंसर महिलाओं में एक गंभीर बीमारी है, जिसका संबंध मोटापे से हो सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार, उच्च BMI ओवरी कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है. हालांकि, इस पर अधिक शोध की आवश्यकता है.

Shivani Mishra
Edited By: Shivani Mishra

Ovarian Cancer: कैंसर शब्द आज भी लोगों में डर पैदा करता है, खासतौर पर जब बात महिलाओं के प्रजनन अंगों से जुड़ी बीमारियों की हो. ओवरी (अंडाशय) कैंसर, स्त्री रोग से संबंधित सबसे जटिल प्रकारों में से एक है, और इसके जोखिम कारकों को लेकर अब भी कई सवाल बाकी हैं. खासतौर पर यह जानना कि क्या शरीर का बढ़ा हुआ वजन या उच्च BMI (बॉडी मास इंडेक्स) इस घातक बीमारी के पीछे एक कारण बन सकता है, यह चर्चा का विषय बना हुआ है.

हालांकि मोटापा कई प्रकार के कैंसर जैसे ब्रेस्ट और गर्भाशय कैंसर के लिए एक स्थापित जोखिम कारक है, लेकिन ओवरी कैंसर को लेकर विशेषज्ञों की राय थोड़ी मिश्रित है. आइए जानते हैं एक्सपर्ट्स इस विषय में क्या कहते हैं और मेडिकल रिसर्च से अब तक क्या संकेत मिलते हैं.

ओवरी कैंसर और BMI

अन्य स्त्री रोग संबंधी कैंसर की तुलना में, ओवरी कैंसर और मोटापे के बीच का संबंध उतना स्पष्ट नहीं है. कुछ स्टडीज़ में यह पाया गया है कि उच्च BMI और ओवरी कैंसर के बीच कमजोर लेकिन ध्यान देने योग्य संबंध है.

Roswell Park Cancer Institute में की गई एक केस-कंट्रोल स्टडी में यह पाया गया कि रजोनिवृत्त (postmenopausal) महिलाओं में हाई BMI का कोई विशेष प्रभाव नहीं दिखा, लेकिन प्रीमेनोपॉज़ल यानी रजोनिवृत्ति से पहले की महिलाओं में, जिनका BMI 30 या उससे अधिक था, उनमें ओवरी कैंसर होने की आशंका दोगुनी से भी ज्यादा पाई गई (adjusted OR = 2.19).

मोटापे से कैंसर के जोखिम को कैसे जोड़ा जा सकता है?

हालांकि अभी इस संबंध को पूरी तरह से समझा नहीं गया है, लेकिन कुछ जैविक सिद्धांत इसकी संभावनाएं जरूर दर्शाते हैं. शरीर की वसा ऊतक (adipose tissue) एस्ट्रोजेन जैसे हार्मोन का उत्पादन करती है. जब यह हार्मोन अत्यधिक मात्रा में मौजूद होता है, तो यह कुछ प्रकार के कैंसर को बढ़ावा दे सकता है.

गर्भाशय कैंसर के मामले में यह लिंक स्पष्ट रूप से देखा गया है, वहीं ओवरी कैंसर में यह प्रभाव थोड़ा कम प्रत्यक्ष है. हाल की कुछ स्टडीज़ में यह संकेत मिला है कि रक्त में बढ़े हुए एस्ट्रोजेन लेवल्स से ओवरी के कुछ सीमावर्ती (borderline) या प्रारंभिक स्टेज के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है.

हार्मोनल असंतुलन भी है एक संभावित कारक

मोटापे से संबंधित हार्मोनल असंतुलन जैसे हाइपरइंसुलिनिमिया, इंसुलिन-लाइक ग्रोथ फैक्टर (IGF-1) और एंड्रोजेन्स के बढ़े हुए स्तर से कोशिकाओं का अनियंत्रित विभाजन होता है. यह माना जा रहा है कि यही प्रक्रिया एपिथीलियल ओवरी कैंसर — ओवरी कैंसर का सबसे सामान्य प्रकार — को जन्म दे सकती है.

जेनेटिक फैक्टर और हार्मोन थेरेपी का प्रभाव

BMI के प्रभाव को समझते समय, अन्य जोखिम कारकों को भी ध्यान में रखना जरूरी है. खासतौर पर पोस्टमेनोपॉज़ल हार्मोन थेरेपी लेने वाली महिलाओं में, विशेष रूप से केवल एस्ट्रोजेन थेरेपी लेने वालों में, BMI के अनुसार जोखिम प्रोफाइल अलग हो सकते हैं.

इसके अलावा, BRCA1 और BRCA2 जैसे जेनेटिक म्यूटेशन वाली महिलाओं में ओवरी कैंसर का आजीवन जोखिम 70% तक हो सकता है यह जोखिम उनके वजन से स्वतंत्र होता है.

मोटापा उपचार पर भी डालता है असर

अगर मोटापा ओवरी कैंसर के होने का सीधा कारण नहीं भी है, तो यह रोग की गंभीरता, इलाज की प्रतिक्रिया और मरीज की जीवन प्रत्याशा पर निश्चित रूप से प्रभाव डालता है. रिसर्च में यह पाया गया है कि जिन महिलाओं का BMI कम होता है, वे सर्जरी के बाद जल्दी रिकवर करती हैं और उनकी 5 साल की सर्वाइवल रेट अधिक होती है.

Disclaimer: ये आर्टिकल मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है, JBT इसकी पुष्टि नहीं करता.

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