केला या बनाना शेक? गट हेल्थ के लिए कौन सा तरीका है सबसे फायदेमंद, जानें बेस्ट ऑप्शन

केले और दूध का कॉम्बिनेशन दोस्त या दुश्मन? यह सवाल लाखों लोगों के मन में उलझन पैदा करता है. क्या बनाना शेक पीने से शरीर को फायदा होता है या नुकसान? आज हम आपको बताएंगे कि इन दोनों को मिलाकर पीने पर शरीर में असल में क्या होता है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

नई दिल्ली: गट हेल्थ को बेहतर बनाए रखने में फलों की अहम भूमिका मानी जाती है. फाइबर से भरपूर फल न सिर्फ पाचन तंत्र को मजबूत करते हैं, बल्कि शरीर को जरूरी पोषण भी देते हैं. इन्हीं फलों में केला एक ऐसा विकल्प है, जिसे हर उम्र के लोग अपनी डाइट में शामिल करते हैं.

चाहे बच्चों की सेहत हो, जिम के बाद की डाइट या फिर वेट लॉस का प्लान- केला हर स्थिति में एक आसान और हेल्दी स्नैक माना जाता है. स्वाद में मीठा, पचाने में आसान और पेट को लंबे समय तक भरा रखने वाला केला गट हेल्थ के लिए भी फायदेमंद बताया जाता है. लेकिन सवाल ये है कि गट हेल्थ के लिए केला सीधा खाना बेहतर है या फिर बनाना शेक के रूप में लेना सही रहता है? आइए जानते हैं एक्सपर्ट की राय.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

आयुर्वेद एक्सपर्ट का मानना है कि केले का सेवन किस रूप में करना है, यह व्यक्ति की जरूरत और लाइफस्टाइल पर निर्भर करता है. एक्सपर्ट के मुताबिक जो लोग जिम या नियमित एक्सरसाइज करते हैं, उनके लिए केले का शेक फायदेमंद हो सकता है. इसकी वजह यह है कि दूध के साथ केला लेने पर उसे पचाने में शरीर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, इसलिए फिजिकली एक्टिव होना जरूरी है. वहीं जो लोग अपनी गट हेल्थ को दुरुस्त रखना चाहते हैं, उनके लिए केले को सीधा खाना ज्यादा बेहतर माना जाता है.

क्यों केला सीधा खाना माना जाता है बेस्ट?

आयुर्वेद के अनुसार किसी भी भोजन को चबाकर खाना पाचन के लिए सबसे अच्छा होता है. चबाने की प्रक्रिया के दौरान भोजन लार के साथ मिल जाता है, जिससे पाचन एंजाइम्स सक्रिय हो जाते हैं. जब केला अच्छे से चबाकर खाया जाता है, तो यह लार के साथ मिलकर पेट में जाता है और शरीर को दोगुना फायदा पहुंचाता है. इससे न सिर्फ केला आसानी से पचता है, बल्कि उसके सारे न्यूट्रिएंट्स भी शरीर को सही तरीके से मिलते हैं.

स्मूदी या बनाना शेक में क्या है दिक्कत?

जब केला स्मूदी या शेक के रूप में लिया जाता है, तो चबाने की जरूरी प्रक्रिया छूट जाती है. इसके अलावा आयुर्वेद के मुताबिक दूध और केले की तासीर अलग-अलग होती है. दो अलग तासीर वाली चीजों को मिलाकर सेवन करने से डाइजेशन स्लो हो सकता है. इससे शरीर कमजोर पड़ती है और कफ दोष बढ़ने की आशंका रहती है. नतीजतन सर्दी, खांसी, साइनस कंजेशन और एलर्जी जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है.

शरीर में क्या रिएक्शन करता है बनाना शेक?

एक्सपर्ट्स के अनुसार जब बनाना शेक पेट में जाता है, तो दूध हाइड्रोक्लोरिक एसिड के साथ रिएक्ट करता है. इससे शरीर की नेचुरल डाइजेस्टिव प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. दूध अकेले पीने से जहां प्रोटीन मिलता है, वहीं केले के साथ लेने पर स्थिति बदल जाती है. केले में मौजूद मैलिक एसिड और साइट्रिक एसिड जैसे ऑर्गेनिक एसिड दूध को जल्दी फाड़ देते हैं. इससे डाइजेशन स्लो होता है और पोषक तत्वों का सही अवशोषण भी प्रभावित हो सकता है.

केला और दूध लेने का सही तरीका

अगर दिनभर की डाइट में दूध और केला दोनों शामिल करना चाहते हैं, तो एक्सपर्ट दूसरा तरीका अपनाने की सलाह देते हैं. मील के बाद केले को अच्छी तरह चबाकर खाएं और इसके करीब दो घंटे बाद एक गिलास दूध पिएं. यह जरूरी नहीं है कि बनाना शेक हर किसी को सूट करे. खासतौर पर जिन लोगों को पेट से जुड़ी समस्याएं रहती हैं, उन्हें केले का शेक एक्सपर्ट की सलाह के बाद ही पीना चाहिए.

Disclaimer:- इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है. किसी भी तरह की डाइट या हेल्थ रूटीन शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या न्यूट्रिशन एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें.

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